रेडियो पर 24 घंटे बजता था मोहम्मद रफी का ये गाना,दीवाने हो गए थे लोग, 75 सालों से भी है पुराना गीत

Jul 14, 2026 - 12:33
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रेडियो पर 24 घंटे बजता था मोहम्मद रफी का ये गाना,दीवाने हो गए थे लोग, 75 सालों से भी है पुराना गीत

मोहम्मद रफी 40 के दशक से हिंदी फिल्मों में अपनी आवाज का जादू चलाते आए हैं। शुरुआत में पहचान मिलना मुश्किल था, लेकिन जब सुरों से सजी आवाज उस दौर में फिल्मों, रेडियो में सुनाई देती तो सब बस कायल हो जाते। मोहम्मद रफी की आवाज में गाया एक ऐसा भी गाना था जो 24 घंटे अलग-अलग रेडियो स्टेशन पर बार-बार सुनाई देता। म्यूजिक कंपोजर खय्याम ने खुद कहा था कि रफी साहब का ये गाना उस दौर में हर रेडियो चैनल की जान बन गया था।इस गाने का चला था जादू1950 के दशक में एक फिल्म रिलीज हुई थी जिसका नाम था बीवी। इस फिल्म के बारे में आपको अ=ज्यादा जानकारी नहीं मिलेगी। फिल्म के डायरेक्टर किशोर शर्मा थे और लीड एक्टर्स थे अल नासिर, मुमताज शांति और प्राण। इस फिल्म का म्यूजिक खय्याम ने तैयार किया था। इस फिल्म में एक गाना है 'अकेले में वो घबराते तो होंगे, मिटाके मुझको पछताते तो होंगे'। ये गाना उस दौर का सबसे खूबसूरत माना गया था। मोहम्मद रफी की आवाज के जादू को फिल्ममेकर समझ गए थे। इसलिए हर बड़े गाने के लिए उन्हीं से गाना गवाया जाता। मोहम्मद रफी भी हर गाने में अपनी जान डाल देते थे। इसलिए वो उस दौर के सबसे बड़े सिंगर कहे जाते। इनके बाद किशोर कुमार का दौर शुरू हुआ।24 घंटे बजता था ये गानाम्यूजिक कंपोजर खय्याम ने अपने एक इंटरव्यू के मोहम्मद रफी के इस गेम के बारे में बात की थी। उन्होंने कहा था, ‘तो ये रफी साहब की आवाज में इतना मशहूर हुआ यानी रेच ऑफ द नेशन हो गया था ये गाना। ‘अकेले में वो घबराते तो होंगे। मिटाके मुझको पछताते तो होंगे।’ अलग-अलग स्टेशन से अलग-अलग सेक्टर से ही गाना बजाया करते थे। और कहीं ना कहीं से ये गाना ब्रॉडकास्ट हो रहा होता। 24 घंटे।’ इस गाने को महेंद्र कपूर ने भी अपनी आवाज में उन्हीं का अंदाज कॉपी करके गाया था।मोहम्मद रफी का सुनहरा दौर40 से लेकर 70 के दशक तक मोहम्मद रफी का दौर रहा। इस दौरान उन्होंने अपने जीवन के कई बेस्ट गाने गाए। उनकी आवाज में ‘ये दुनिया ये महफिल’, ‘बहारों फूल बरसाओ’, जैसे गाने गाए। फिल्म हम किसी से कम नहीं के गाने ‘क्या हुआ तेरा वादा’ के लिए उन्होंने अपने जीवन का पहला नेशनल अवॉर्ड जीता। फिल्मफेयर अवॉर्ड भी इस गाने के नाम रहा। आज भी मोहम्मद रफी का सुनहरा दौर और उनके गाने याद किए जाते हैं।

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