स्ट्रोक की समय पर पहचान बचा सकती है मस्तिष्क, दिल्ली AIIMS में 400 विशेषज्ञों ने दिए अहम सुझाव
एम्स दिल्ली में इंडियन स्ट्रोक एसोसिएशन की सीएमई में 400 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया। इसमें स्ट्रोक की रोकथाम, शुरुआती पहचान और उन्नत उपचार तक की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
एम्स में ‘भारत में स्ट्रोक देखभाल का विस्तार : रोकथाम से उन्नत उपचार तक’ विषयक आयोजित सीएमई मैं भाग लेते प्रतिभागी और संबोधित करते वक्ता : सौजन्य एम्स
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। स्ट्रोक की समय पर पहचान, तत्काल उपचार और बेहतर रेफरल व्यवस्था से मस्तिष्क को होने वाली स्थायी क्षति को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर बड़े अस्पतालों तक स्ट्रोक की रोकथाम, शुरुआती पहचान और उपचार की व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।
एम्स नई दिल्ली के न्यूरोलाजी विभाग की ओर से छह अगस्त को आयोजित इंडियन स्ट्रोक एसोसिएशन की सीएमई में विशेषज्ञों ने देश में स्ट्रोक देखभाल की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया।
सीएमई में 400 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों ने हिस्सा लिया। विषय ‘भारत में स्ट्रोक देखभाल का विस्तार : रोकथाम से उन्नत उपचार तक’ था। इसका आयोजन मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं की जांच के लिए होने वाली सेरेब्रल एंजियोग्राफी के 100 वर्ष पूरे होने और इसके जनक एगास मोनिज को श्रद्धांजलि के अवसर पर किया गया।
इस मौके पर एम्स के निदेशक प्रो. निखिल टंडन ने कहा कि स्ट्रोक चिकित्सा अब केवल तंत्रिका संबंधी कमजोरी और अन्य लक्षणों की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि मस्तिष्क के कार्य को बचाने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि स्ट्रोक की रोकथाम और उपचार सामूहिक जिम्मेदारी है। चिकित्सा व्यवस्था का लक्ष्य स्ट्रोक से मस्तिष्क को हुए नुकसान का उपचार करने के साथ ही मस्तिष्क के कार्य को सुरक्षित रखना होना चाहिए।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की अपर सचिव व राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक अराधना पटनायक ने स्ट्रोक की रोकथाम, शुरुआती पहचान और समय पर रेफरल को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से स्ट्रोक के जोखिम कारकों की जांच तथा आशा, एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों और चिकित्सा अधिकारियों के प्रशिक्षण पर जोर दिया। उन्होंने हब-एंड-स्पोक व्यवस्था के माध्यम से प्राथमिक और विशेषज्ञ उपचार केंद्रों के बीच रेफरल व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत बताई।
नीति आयोग के सदस्य प्रो. एम. श्रीनिवास ने कहा कि स्ट्रोक देखभाल में रोकथाम, शुरुआती पहचान, आपात उपचार, पुनर्वास और सामुदायिक जागरूकता सभी को एक साथ मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने 12 आकांक्षी जिलों में चल रही ब्रेन हेल्थ पहल का उल्लेख करते हुए बहुविषयक सहयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्कूली बच्चे भी स्ट्रोक के प्रति जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
एम्स के न्यूरोसाइंसेज सेंटर के प्रमुख और न्यूरोइमेजिंग एवं इंटरवेंशनल न्यूरोरेडियोलाजी विभागाध्यक्ष प्रो. शैलेश बी. गायकवाड़ ने देशभर में स्ट्रोक के इंटरवेंशनल उपचार की सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने स्वदेशी न्यूरोवैस्कुलर उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने स्ट्रोक इंटरवेंशन और कैरोटिड स्टेंटिंग के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम में एम्स के न्यूरोलाजी विभाग की प्रमुख प्रो. मंजरी त्रिपाठी, प्रो. अचल के. श्रीवास्तव, इंडियन स्ट्रोक एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. विक्रम हुड्डेड और डा. अरविंद शर्मा सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे। सीएमई में स्ट्रोक की रोकथाम, शुरुआती पहचान, समय पर रेफरल, उन्नत उपचार और पुनर्वास को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
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