'सब चले गए, अब कोई उम्मीद नहीं बची'; CJP प्रोटेस्ट को याद कर बोले सोनम वांगचुक

Aug 31, 2026 - 12:53
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'सब चले गए, अब कोई उम्मीद नहीं बची'; CJP प्रोटेस्ट को याद कर बोले सोनम वांगचुक

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को पुलिस की कार्रवाई के बाद सीजेपी के नेता आंदोलन खत्म करने का रास्ता तलाश रहे थे। कार्रवाई के दौरान प्रदर्शन का मंच हटा दिया गया था और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी वहां से चले गए थे। वांगचुक ने प्रखर गुप्ता के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान बताया, 'इस कार्रवाई के बाद CJP नेतृत्व का मनोबल बुरी तरह टूट गया था। मैंने उनसे ऐसा संदेश तैयार करने को कहा था, जिससे प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर छोड़कर घर लौटने के लिए कहा जा सके।'सोनम वांगचुक के मुताबिक, 20 जुलाई की कार्रवाई के बाद सीजेपी नेताओं ने उनसे कहा था, 'अब सभी चले गए हैं, हमारा मंच भी टूट गया है, अब कोई उम्मीद नहीं है।' आयोजक चाहते थे कि वह प्रदर्शनकारियों के लिए ऐसा मैसेज जारी करें जिसमें कहा जाए कि वे थक चुके हैं और अब उन्हें आराम करने के लिए घर जाना चाहिए। वांगचुक ने कहा, 'उन्होंने मुझसे कुछ ऐसा पोस्ट करने को कहा था कि अब आपको अच्छी तरह आराम करने की जरूरत है, घर जाकर सो जाइए, जंतर-मंतर पर मत रुकिए। कल देखेंगे कि क्या करना है।' उन्होंने ऐसा संदेश तैयार भी किया था, लेकिन उसे पोस्ट नहीं किया गया।1-2 लाख लोग उसी रात चले गए: सोनम वांगचुकवांगचुक ने कहा कि 20 जुलाई की कार्रवाई के बाद सीजेपी नेतृत्व को लगने लगा था कि आंदोलन लगभग खत्म हो चुका है। नेताओं को लगा कि प्रदर्शन में शामिल होने वाले 1-2 लाख लोग उसी रात वहां से चले गए और अब सब कुछ खत्म हो गया। उस समय आयोजकों के मन में यह भी था कि अगर आंदोलन दोबारा शुरू हुआ तो ठीक, नहीं तो इसे यहीं खत्म समझा जाएगा। हालांकि अगले दिन युवा प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर लौटना शुरू कर दिया। इससे आंदोलन के नेतृत्व का गिरा हुआ मनोबल फिर से बढ़ने लगा।‘लाठीचार्ज के बावजूद लोग वापस लौटे’सोनम वांगचुक ने उन युवाओं की तारीफ की, जो पुलिस की लाठीचार्ज कार्रवाई का सामना करने के बावजूद अगले दिन वापस प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि इन युवाओं ने कुछ असाधारण किया। वांगचुक के मुताबिक, आंदोलन का नेतृत्व वहां मौजूद लोगों की संख्या और उनके चेहरों को देखकर अपना मनोबल तय करता था। जब प्रदर्शनकारी चले गए तो नेताओं का हौसला टूट गया, लेकिन अगले दिन युवाओं की वापसी से उनका आत्मविश्वास फिर लौट आया। उन्होंने कहा कि मंच टूटने और लाठीचार्ज के बावजूद लौटने वाले युवाओं ने आयोजकों को आंदोलन जारी रखने की ताकत दी।

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