बीआरएबीयू में पीजी की पढ़ाई बदलेगी, नए सिलेबस पर लगी मुहर, डिग्री-मार्कशीट में भी होंगे बदलाव
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय की सिंडिकेट ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप पीजी प्रथम व द्वितीय सेमेस्टर के नए पाठ्यक्रम को मंजूरी दे दी है। यह नया ...और पढ़ें
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर । बिहार के विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के अनुरूप स्नातकोत्तर (पीजी) शिक्षा का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय की सिंडिकेट ने सोमवार को पीजी प्रथम व द्वितीय सेमेस्टर के लिए तैयार किए गए नए पाठ्यक्रम को मंजूरी दे दी। इससे पहले इस प्रस्ताव को एकेडमिक काउंसिल की स्वीकृति भी मिल चुकी है।
अब इसी शैक्षणिक सत्र से नया सिलेबस लागू किया जाएगा। बैठक कुलपति प्रो.दिनेश चंद्र राय की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय अतिथि गृह में हुई। इसमें एनईपी-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार लोकभवन के निर्देश पर दो वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम के पहले वर्ष के लिए 22 विषयों का नया एवं संशोधित सिलेबस तैयार किया गया है। इनमें कई नए विषय पहली बार शामिल किए गए हैं, जबकि कई पुराने विषयों को एनईपी-2020 के अनुरूप अद्यतन किया गया है। भविष्य में इन नए विषयों की पढ़ाई शुरू करने का रास्ता भी इससे साफ हो गया है।
सिंडिकेट ने गांधियन थाट, आंबेडकर थाट, बुद्धिस्ट थाट, भूगोल, पर्सनल मैनेजमेंट एंड इंडस्ट्रियल रिलेशंस, बायोकेमिस्ट्री, बाटनी, सांख्यिकी, अंगिका, उर्दू, राजनीति विज्ञान, बंगाली, गृह विज्ञान, संस्कृत, अरबी, इलेक्ट्रानिक साइंस, पाली, शिक्षा, प्राकृत, ग्रामीण अर्थशास्त्र, ग्रामीण अध्ययन व प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व सहित 22 विषयों के सिलेबस को मंजूरी दी गई।
सिंडिकेट की बैठक में परीक्षा विभाग द्वारा डिग्री व मार्कशीट के नए प्रारूप को भी स्वीकृति दी गई। नए निर्णय के अनुसार डिग्री पर फिलहाल छात्र-छात्राओं का नाम केवल अंग्रेजी में अंकित होगा।
वहीं मार्कशीट में केवल ग्रेड ही नहीं, प्राप्तांक (अंक) भी दर्ज किए जाएंगे ताकि मेधावी छात्रों और टापर का निर्धारण करने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। डिग्री पर केवल अंग्रेजी में नाम अंकित करने के प्रस्ताव पर कुछ सदस्यों ने आपत्ति की।
इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि लंबित डिग्रियों के शीघ्र निष्पादन को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की गई है। भविष्य में छात्र के अनुरोध पर अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी नाम अंकित करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
सिंडिकेट ने विश्वविद्यालय के सभी आधिकारिक कार्यक्रमों की शुरुआत कुलगीत से करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि भविष्य में इस पर किसी प्रकार की लापरवाही न हो, इसलिए इसे सिंडिकेट की स्वीकृति देकर अनिवार्य बनाया गया है।
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