महाराष्ट्र में हॉस्टल घोटाला; बिना किसी छात्र के ही निकाल लिए 1.64 करोड़ रुपये, CAG रिपोर्ट में खुलासा

Jul 14, 2026 - 12:33
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महाराष्ट्र में हॉस्टल घोटाला; बिना किसी छात्र के ही निकाल लिए 1.64 करोड़ रुपये, CAG रिपोर्ट में खुलासा

सीएजी ने महाराष्ट्र में सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों के लिए हॉस्टल योजना में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया है। महाराष्ट्र विधानसभा के मॉनसून सत्र में पेश रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 6 ऐसे छात्रावास हैं, जिनमें एक भी छात्र नहीं रह रहा था। उन्हें वर्ष 2020 से 2024 के बीच कुल 1.62 करोड़ रुपये की सरकारी सहायता जारी की गई। सामाजिक न्याय व विशेष सहायता विभाग ने बिना किसी प्रभावी सत्यापन और निगरानी के इन गैर-कार्यरत छात्रावासों को लगातार धन जारी रखा। सीएजी ने इसे कल्याणकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था की बड़ी विफलता बताया है।रिपोर्ट में जालना जिले के मोदीखान छात्रावास का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। ऑडिट के दौरान यह भवन जर्जर, बंद और पूरी तरह खाली मिला, लेकिन सरकारी कागजात में यहां 38 छात्रों का नामांकन और एक अधीक्षक की नियुक्ति दर्ज थी। इतना ही नहीं, इस हॉस्टल के लिए चार वर्षों तक 18 लाख रुपये का मानदेय भी जारी किया गया। जालना जिले के जाफराबाद स्थित 24 छात्रों की क्षमता वाले छात्रावास में भी कोई छात्र नहीं मिला और वहां बिस्तरों पर धूल जमी हुई थी। इसी तरह जालना के चार, बुलढाणा और लातूर के एक-एक छात्रावास को भी खाली थे। सीएजी ने कहा कि इन मामलों से विभाग की सत्यापन और निगरानी प्रणाली की गंभीर खामियां उजागर होती हैं।छात्रावासों की बदहाल स्थिति का जिक्रसीएजी ने केवल वित्तीय अनियमितताओं ही नहीं, बल्कि छात्रावासों की बदहाल स्थिति की ओर भी ध्यान दिलाया है। मार्च 2024 तक राज्य में 443 सरकारी और 2,388 अनुदानित छात्रावास चल रहे थे, जिनमें लगभग 1.62 लाख विद्यार्थियों के रहने की क्षमता है। ऑडिट के दौरान 39 छात्रावासों का निरीक्षण किया गया, जहां भोजन कक्ष, पुस्तकालय, कंप्यूटर लैब, सीसीटीवी, बिजली बैकअप और स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव मिला। कई छात्र भोजन के समय फर्श पर बैठने को मजबूर थे, नियमित स्वास्थ्य जांच नहीं हो रही थी। कई स्थानों पर खराब भोजन, गंदगी और हल्की रोशनी जैसी समस्याएं सामने आईं।बायोमेट्रिक सिस्टम में से केवल 46 ही चालूरिपोर्ट के मुताबिक, 280 छात्रावासों में लगाए गए बायोमेट्रिक सिस्टम में से केवल 46 ही चालू मिले, जिससे छात्रों की वास्तविक उपस्थिति का रिकॉर्ड भी सही तरीके से नहीं रखा जा रहा था। साल 2023-24 में सरकारी छात्रावासों के लिए आवंटित 487 करोड़ रुपये में से 56.65 करोड़ रुपये खर्च ही नहीं किए गए। इसका सीधा असर छात्रावास विस्तार योजना पर पड़ा और 117 तालुकों के 8,930 छात्र छात्रावास सुविधा से वंचित रह गए। इसके अलावा 49 सरकारी छात्रावास बिना अधीक्षक के चल रहे थे। 5 बालिका छात्रावासों की जिम्मेदारी पुरुष अधीक्षकों को सौंपी गई थी। राज्य सरकार वर्ष 2020 तक 500 सरकारी छात्रावास बनाने का लक्ष्य भी पूरा नहीं कर सकी और मार्च 2024 तक केवल 443 हॉस्टल ही स्थापित हो पाए।

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