रिलेशनशिप में लड़कियों को कभी नहीं करना चाहिए ये काम, हाईकोर्ट की सलाह

Jul 15, 2026 - 05:37
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रिलेशनशिप में लड़कियों को कभी नहीं करना चाहिए ये काम, हाईकोर्ट की सलाह

मद्रास हाईकोर्ट की एक सलाह इन दिनों चर्चा में है। दरअसल डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर प्यार और वादों के झांसे में आकर अपनी प्राइवेसी दांव पर लगाने वाली युवतियों को लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने एक बेहद अहम एडवाइजरी जारी की है। हाईकोर्ट ने इस एडवाइजरी में साफ लफ्जों में कहा है कि रिलेशनशिप में रहते हुए महिलाओं को अपने पार्टनर के साथ किसी भी तरह की निजी तस्वीरें या वीडियो शेयर नहीं करनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि चाहे साथी पर कितना भी भरोसा हो या उसने गोपनीयता का कितना भी बड़ा वादा क्यों न किया हो, लड़कियों को यह कदम नहीं उठाना चाहिए।जस्टिस एन आनंद वेंकटेश और जस्टिस केके रामकृष्णन की पीठ ने एक दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग के मामले में दोषी की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए यह सलाह दी है। कोर्ट ने इस संबंध में अंग्रेजी, तमिल और हिंदी में एक खास एडवाइजरी जारी की। इसमें अदालत ने आज के डिजिटल दौर की कड़वी सच्चाई को सामने रखते हुए कहा कि एक बार जब कोई इंटीमेट फोटो या वीडियो किसी व्यक्ति के अपने नियंत्रण से बाहर चला जाता है, तो उसका दुरुपयोग करना बेहद आसान हो जाता है।कोर्ट ने कहा कि इस तरह के तस्वीरों के मिसयूज से पीड़िता की प्राइवेसी, सम्मान और मानसिक स्थिति को ऐसा नुकसान पहुंचता है जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि बाद में अदालतों और कानूनी चक्करों की प्रक्रिया से गुजरने से कहीं बेहतर है कि शुरुआत में ही सावधानी बरतकर खुद का बचाव किया जाए।निजता बेहद जरूरी- HCअदालत ने अपने फैसले में निजता और शालीनता को मानव सभ्यता की शुरुआत से ही गरिमा का एक अटूट हिस्सा बताया। जजों ने बाइबिल के एडम और ईव के प्रसंग का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एडम और ईव का खुद को पत्तों से ढकना दिखाता है कि इंसान हमेशा से अपनी प्राइवेसी और शालीनता को बचाना चाहता है। कपड़े सिर्फ एक शारीरिक जरूरत नहीं, बल्कि इंसानी सम्मान और सामाजिक व्यवस्था का एक जरूरी हिस्सा हैं।कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि डिजिटल युग में कुछ धोखेबाज और बेईमान लोग युवा लड़कियों और महिलाओं के भरोसे व उनकी भावनात्मक कमजोरी का फायदा उठा रहे हैं। पीड़ितों को धोखे, झूठे वादों या इमोशनल मैनिपुलेशन के जरिए जाल में फंसाया जाता है और उनसे निजी तस्वीरें या वीडियो ले लिए जाते हैं। एक बार हाथ आते ही अपराधी उन्हें सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वायरल करने की धमकी देने लगते हैं। इसके बाद शोषण, बेइज्जती और मानसिक प्रताड़ना का सिलसिला शुरू हो जाता है।उम्रकैद की सजा बरकरारइससे पहले मद्रास हाईकोर्ट में एक शख्स ने अपनी उम्रकैद की सजा को चुनौती दी थी। बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक काशी ने फेसबुक के जरिए एक महिला से संपर्क किया था। इसके बाद उसने महिला को नौकरी और शादी का झांसा देकर पहले उसका भरोसा जीता। इसके बाद उसने महिला का यौन उत्पीड़न किया, उसकी इंटिमेट तस्वीरों को चुपके से रिकॉर्ड कर लिया और बाद में अपनी नाजायज मांगें पूरी न होने पर उसे सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी। पीठ ने इस मामले में काशी को राहत देने से इनकार कर दिया और उम्रकैद की सजा बरकरार रखी।

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