जब EC को ही तय करना है सब तो आप हड़बड़ी में क्यों? HC के निशाने पर बंगाल स्पीकर; दागे ताबड़तोड़ सवाल

Jul 15, 2026 - 05:37
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जब EC को ही तय करना है सब तो आप हड़बड़ी में क्यों? HC के निशाने पर बंगाल स्पीकर; दागे ताबड़तोड़ सवाल

पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस पर सवाल उठाए हैं और पूछा है कि आखिर स्पीकर को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त करने में इतनी हड़बड़ी या जल्दबाजी क्यों है? हाई कोर्ट की जस्टिस चंपा सरकार ने मंगलवार को स्पीकर रथिंद्र बोस की उस 'जल्दबाजी' पर टिप्पणी की, जिसके तहत उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी को बंगाल विधानसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त किया।हाई कोर्ट ने पूछा कि जब असली तृणमूल कांग्रेस कौन है, इस पर चुनाव आयोग को अभी फैसला ही करना है तो स्पीकर ने यो जल्दबाजी क्यों दिखाई? जज ने टिप्पणी की, जब चुनाव आयोग को फैसला करना है, तो स्पीकर यह क्यों तय कर रहे कि कौन सी पार्टी असली पार्टी है... कौन असली विपक्ष है और उसका नेता कौन है, और किसी एक को विपक्ष का नेता घोषित कर रहे थे? जस्टिस सरकार ने पूछा, “जब इससे जुड़ा एक और मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है... जब मामले का फैसला चुनाव आयोग को करना है, तो विधानसभा स्पीकर को यह फैसला लेने की इतनी जल्दी क्यों थी?”ममता की पसंद थे शोभनदेव चट्टोपाध्यायजस्टिस सरकार पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी शोभनदेव चट्टोपाध्याय की याचिका पर सुनवाई कर रही थीं। चट्टोपाध्याय विपक्ष के नेता के पद के लिए ममता बनर्जी की पसंद थे। ममता के समर्थकों का लंबे समय से यह कहना रहा है कि स्पीकर इस मामले में एकतरफा फैसला ले रहे हैं जो अलोकतांत्रिक और कानूनी रूप से जल्दबाजी में लिया गया फैसला है क्योंकि नई दिल्ली में मामला लंबित है।असली तृणमूल कौन सी है?बता दें कि चुनाव आयोग यह तय करने की प्रक्रिया में है कि असली तृणमूल कौन सी है। यह मामला उन 28 में से 20 तृणमूल लोकसभा सांसदों से अलग है जो नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया में शामिल हो गए थे, और उन 13 राज्यसभा सदस्यों में से तीन से भी अलग है जिन्होंने इस्तीफा दे दिया था ताकि बीजेपी उन्हें उच्च सदन के उपचुनावों के लिए फिर से मैदान में उतार सके।स्पीकर का एक अंतरिम कदम माना जाएचट्टोपाध्याय की ओर से वरिष्ठ वकील और तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने तर्क दिया कि स्पीकर बोस ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया है। उन्होंने कहा कि इस नियुक्ति को कम से कम तब तक रोक दिया जाना चाहिए था जब तक कि चुनाव आयोग इस मामले पर फैसला न कर ले। वहीं ऋतब्रत बनर्जी की ओर से वकील जॉयदीप कर और राज्य सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल बिलवदल भट्टाचार्य ने कोर्ट को यह समझाने की कोशिश की कि इसे स्पीकर बोस का एक अंतरिम कदम माना जाए।बुधवार को फिर सुनवाईइस पर जस्टिस सरकार ने कहा कि किसी गैर-कानूनी कदम को अंतरिम कदम के तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। जस्टिस सरकार ने कहा, लेकिन जब तक (EC का) फैसला नहीं आ जाता और (तृणमूल) दो गुटों में बंट गई है, तब तक स्पीकर ने ऐसा कैसे किया? मेरा सवाल यही है। ऋतब्रत बनर्जी के वकील ने जस्टिस चंपा सरकार और जस्टिस अजय कुमार गुप्ता की खंडपीठ के समक्ष दलील दी कि उनकी नियुक्ति संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुरूप की गई है। इसके बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई बुधवार (15 जुलाई) दोपहर 3 बजे तय कर दी।

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