सोनम वांगचुक के लिए भावुक हुए शशि थरूर, कहा- अनशन छोड़िए, संसद में उठाएंगे आवाज
जंतर मंतर पर आंदोलनरत सोनम वांगचुक को अब कांग्रेस सांसद शशि थरूर का समर्थन मिला है। शशि थरूर ने बुधवार को एक ओपन लेटर लिखकर सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने की गुजारिश की है। इस भावुक पत्र में शशि थरूर ने अनुरोध करते हुए कहा के इस मुद्दे को भूख हड़ताल से नहीं सुलझाया जा सकता और इसीलिए अनशन को यहीं खत्म कर देना चाहिए। साथ ही थरूर ने यह आश्वासन भी दिया कि वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के मुद्दे को संसद में उठाएंगे।बता दें कि NEET परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और धांधली के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 25 दिनों से चल रहा प्रदर्शन अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। इस आंदोलन में 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे मशहूर पर्यावरणविद और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल सहित विपक्षी दल के कई बड़े नेताओं ने सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की है। अब शशि थरूर ने एक भावुक अपील की है।थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के नाम अपना पत्र शेयर किया। उन्होंने अपने निजी जीवन का उदाहरण देते हुए लिखा, “मेरे प्यारे युवा दोस्तों, मैं आज आपके सामने एक राजनेता या सांसद के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के रूप में बात कर रहा हूं, जो आपकी पीढ़ी के साथ हो रहे अन्याय से बेहद दुखी है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत विषय है। मेरा जन्म एक मिडिल क्लास फैमिली में हुआ था। मेरे पिता एक अखबार में कर्मचारी थे और मां गृहिणी थीं। उनके ऊपर तीन बच्चों की जिम्मेदारी थीं। हमारे जैसे परिवारों के लिए मेरिट महज नारा नहीं था। स्कॉलरशिप, निष्पक्ष ढंग से होने वाली परीक्षाएं और ईमानदार नतीजे, यही एकमात्र रास्ता था जिससे एक मिडिल क्लास पिता अपने तीन बच्चों के सपनों को पूरा कर सकता था।”थरूर ने आगे लिखा कि जब यह सिस्टम टूट जाता है पेपर लीक होते हैं, परीक्षाएं रद्द होती हैं और भरोसा टूटता है, तो अमीर और ताकतवर लोगों के बच्चों को कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि उनके पास आगे बढ़ने के लिए दूसरी सीढ़ियां होती हैं। नुकसान सिर्फ गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के सपनों और उनके माता-पिता के बलिदानों का होता है। युवाओं का गुस्सा अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि उस पीढ़ी की पीड़ा है जिसने सब कुछ सही किया लेकिन फिर भी उसे धोखा मिला।सोनम वांगचुक और सरकार के लिए थरूर का खास संदेश17 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने का आग्रह करते हुए थरूर ने कहा, आपने देश की अंतरात्मा को जगा दिया है और एक अनशन का मकसद भी यही होता है। आगे के लंबे रास्ते के लिए भारत को आपकी आवाज की जरूरत है। सोमवार से संसद का सत्र दोबारा शुरू हो रहा है, जहां हमारे पास लोकतंत्र के सबसे बड़े मंच पर छात्रों के इन मुद्दों को उठाने का पूरा मौका होगा। इस समस्या का समाधान संसद में होना चाहिए, न कि आमरण अनशन से। कृपया मेरी प्रार्थना स्वीकार करें। थरूर ने आगे सरकार से आगे बढ़कर इन युवाओं के साथ बातचीत शुरू करने की मांग की। उन्होंने कहा, “यह कोई कमजोरी नहीं है; यह एक कुशल राजनेता का गुण है।”सोनम वांगचुक की बिगड़ी तबीयतइधर कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 25 दिनों से जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा में धांधली और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने बताया कि सोनम वांगचुक की हालत चिंताजनक है। अनशन की शुरुआत से अब तक उनका 8.5 किलोग्राम वजन कम हो चुका है, उनके शरीर की मांसपेशियां कम हो रही हैं और वे भयावह दर्द से गुजर रहे हैं, लेकिन फिर भी उन्होंने अनशन तोड़ने से इनकार कर दिया है। संगठन ने 20 जुलाई को संसद मार्च का भी ऐलान किया है।
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