मॉनसून सत्र में सरकार ने रद्द किए कॉकरोच से जुड़े ये 6 सवाल; सौरव दास ने पूछा- कहां मिलेगा जवाब
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने केंद्र सरकार पर संसद में विपक्ष की आवाज दबाने का गंभीर आरोप लगाया है। एक्स पर एक पोस्ट के जरिए उन्होंने दावा किया है कि हाल ही में संपन्न हुए संसद के मॉनसून सत्र के दौरान सरकार ने कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों से संबंधित प्रश्नों का जवाब देने से इनकार कर दिया। सौरव दास के अनुसार, लोकसभा सांसद माथेस्वरन वी.एस. ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय से सीजेपी और पेपर लीक से जुड़े कुछ सवालों का जवाब मांगा था।सौरव दास के मुताबिक, सांसद द्वारा इन छह मुद्दों पर सवाल किए गए थे। CJP नेता ने बताया कि इन सवालों को लोकसभा के नियम 41(2) के तहत विभिन्न उप-धाराओं का हवाला देते हुए खारिज कर दिया गया। उन्होंने इस फैसले को बेहद अजीब और अनुचित बताया।सौरव दास ने इन 6 मुद्दों का किया जिक्र1. NEET-UG 2026 के लिए आवेदन शुल्क की वापसी।2. सरकार के प्रति जनता का बढ़ता अविश्वास।3. दिल्ली में CJP प्रदर्शनकारियों को पीने के पानी और साफ-सफाई की सुविधा न देना।4. प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के साथ सरकार का संवाद।5. छात्रों का कल्याण, पेपर लीक और शिक्षा में सुधार।6. शांतिपूर्ण विरोध के अपने मौलिक अधिकार का इस्तेमाल करने वाले नागरिकों के साथ व्यवहार। अमित शाह से भी सवालसौरव दास ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि ऐसे जनहित से जुड़े मुद्दों पर संसद में चर्चा नहीं हो सकती तो सरकार की जवाबदेही कहां तय की जाएगी? क्या लोगों को जवाब पाने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ेगा? उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा और सवाल किया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के संवेदनशील दौर में उन्होंने संसद में आकर जवाब क्यों नहीं दिया। सौरव दास ने कहा, किसी सांसद का कार्यपालिका से सवाल पूछने का अधिकार कोई रुकावट नहीं, बल्कि संसदीय लोकतंत्र की आत्मा है। प्रश्नकाल का अस्तित्व ही इसीलिए है ताकि अपार शक्ति रखने वाले मंत्री जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के प्रति जवाबदेह रहें। उन्होंने आगे कहा कि सरकार संसद का मुंह बंद करके उसे अपनी नीतियों पर मुहर लगाने वाली संस्था नहीं बना सकती और न ही देश के युवाओं की अनदेखी कर सकती है।दिमागी नक्सली कहने पर भी भड़केइससे पहले सौरव दास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस पर संबोधन में दिमागी नक्सल के उल्लेख को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केवल सरकार पर सवाल उठाने के कारण पढे़ लिखे युवाओं को नक्सली करार नहीं दिया जा सकता। सीजेपी नेता ने एक पोस्ट में कहा, ''प्रधानमंत्री जी, दिमागी नक्सल या ऐसी कोई भी बात काम नहीं आएगी। आप पढ़े-लिखे युवाओं को नक्सली वगैरह कैसे कह सकते हैं? सिर्फ इसलिए कि वे आपकी सरकार से सवाल पूछते हैं? यह सरासर अहंकार है। उनकी समस्याओं को हल करने में पूरी तरह नाकामी है। बदलाव की घंटी बज चुकी है। जागने का समय आ गया है।''
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