'दिमागी नक्सली' होने पर गर्व है; प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी पर कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम का पलटवार

Aug 16, 2026 - 08:23
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'दिमागी नक्सली' होने पर गर्व है; प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी पर कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम का पलटवार

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से कहा कि देश में बंदूक वाले नक्सली खत्म हो गए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब 'दिमागी नक्सलियों' पर ध्यान देने की जरूरत है। पीएम की इस टिप्पणी के बाद विपक्ष की तरफ से लगातार सत्तापक्ष पर हमला किया जा रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने भी इस पर तीखी टिप्पणई की है।सोशल मीडिया साइट एक्स पर पीएम मोदी की इस टिप्पणी पर पलटवार करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने एक लाइन में इसका जवाब दिया। उन्होंने लिखा, “मुझे दिमागी नक्सली होने पर गर्व है।” इसके बाद उनकी पोस्ट के नीचे लोगों ने अपने-अपने हिसाब से कमेंट करना शुरू कर दिए। सत्ता पक्ष के लोग उन्हें नसीहत देते नजर आए, तो वहीं विपक्षी लोग उनका समर्थन करते हुए नजर आए।क्या कहा था पीएम मोदी ने?भाजपा नीत एनडीए गठबंधन की सरकार शुरुआत से ही यह लक्ष्य बनाकर चल रही है कि वह नक्सलवाद को जड़ से खत्म कर देगी। इसी क्रम में लगातार अभियान चलाया जा रहा है। मार्च में गृहमंत्री अमित शाह ने ऐलान किया था कि देश अब हथियार वाले नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से इसी बात का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश 'हथियारी नक्सलवाद' को जंगलों से खत्म करने में सफल रहा है, लेकिन उसके वैचारिक समर्थक हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने के अवसर तलाश रहे हैं।पीएम ने किया दिमागी नक्सलियों से आगाह- पीएम मोदी ने देशवासियों को ''दिमागी नक्सलियों'' से आगाह किया। उन्होंने आरोप लगाया था कि ऐसे लोगों ने व्यवस्था में अपनी पैठ बना ली है और वे नीतियों को प्रभावित करके समाज के लिए खतरा बने हुए हैं। मोदी ने नागरिकों से ऐसे लोगों की ''पहचान करने और उन्हें अलग-थलग करने'' का आग्रह किया था।पीएम ने कहा, माओवादी सोच वाले लोगों ने वर्षों तक सत्ता के गलियारों में अपनी जगह बना रखी थी। उन्होंने सरकारी समितियों में सलाहकार के रूप में काम किया और सार्वजनिक नीतियों को प्रभावित किया।'' इस चुनौती को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए तथा अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।उन्होंने कहा था कि दशकों से जारी नक्सलवाद और माओवादी हिंसा ने लाखों युवाओं का जीवन तथा उनकी आकांक्षाएं तबाह कर दीं। उन्होंने कहा था कि इस संघर्ष में 3,500 से अधिक पुलिसकर्मी और सुरक्षाकर्मी मारे गए तथा यह संख्या युद्धों में मारे गए सैनिकों की संख्या से कहीं अधिक है।बता दें, पिछले पांच दशक से देश नक्सलवाद आंदोलन से लड़ रहा है। देश के अंदर कई भीषण हिंसाओं में यह लोग शामिल होते थे। यह जंगल में भोले-भाले आदिवासियों को बहला-फुसलाकर उन्हें बंदूक उठाने के लिए मजबूर करते थे। केंद्र सरकार लगातार नक्सलवाद का खात्मा करने में लगी हुई है। अभी तक हजारों नक्सलवादियों ने आत्म समर्पण किया है, जबकि कई बड़े और खूंखार नक्सली मारे भी गए हैं।

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