कैथल के सजूमा गांव में पीलिया का कहर, दूषित पानी से फैला संक्रमण; डर के मारे बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे ग्रामीण
कैथल के सजूमा गांव में दूषित पानी के कारण पीलिया और टाइफाइड फैला, जिससे 33 बच्चों में हेपेटाइटिस-ए की पुष्टि हुई और एक बच्ची की मौत हो गई। ...और पढ़ें
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया, जांच जारी
जागरण संवाददाता, कैथल। सजूमा गांव में पानी के कारण पीलिया फैला, क्योंकि सभी शुरुआत में स्वास्थ्य विभाग की ओर से लिये गए 25 सैंपलों में क्लोरीन भी नहीं मिला था। अभी 10 बच्चे नागरिक अस्पताल और एक निजी अस्पताल में उपचाराधीन है।
पीलिया से डर से सैनी मुहल्ला के अभिभावक बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। गांव में 14 टीमें तैनात की गई हैं। सैनी मुहल्ला के लोग पास के गांव दिवाल से लाकर पानी पी रहे हैं। उधर, पेयजल पाइप लाइन में 21 जगह लीकेज मिल चुकी है। जनस्वास्थ्य विभाग चंडीगढ़ की एक टीम बुधवार को गांव आएगी।
सीएमओ रेणू चावला ने बताया कि टीम के साथ घर-घर जाकर बीमार बच्चों का इलाज करने में लगे हैं। अब तक 89 पीलिया रोग के संदिग्ध मरीज मिले हैं, इनमें से 33 बच्चों में हेपेटाइटिस-ए की पुष्टि हो चुकी है, वहीं नौ बच्चे टाइफायड के मिले हैं। मंगलवार को 18 बच्चों के खून के नमूने लेकर जांच के लिए लैब में भेजा गया है, जिनकी रिपोर्ट अभी आनी है। 10 बच्चों में से नौ बच्चे सरकारी अस्पताल व एक बच्चा निजी अस्पताल में दाखिल है।
ग्रामीण अमित, कृष्ण, महावीर और राजेश ने बताया कि जिस दिन बच्चे बीमार हुए थे, उसी दिन स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दोनों बूस्टर और टयूबवेल पर पहुंचकर निरीक्षण किया था। तीनों जगह डोजर बंद मिले थे। क्लोरीन की कोई व्यवस्था नहीं थी।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में पहले दिन 25 जगह पेयजल की सैंपलिंग की थी, पानी में क्लोरीन की मात्रा नहीं मिली। बच्चे बीमार होने के बाद ही जनस्वास्थ्य विभाग ने तीनों डोजर चलाए और क्लोरीन डाला गया है। संदीप और सूबे सिंह ने बताया कि जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी गलत रिपोर्ट दे रहे हैं।
गांव में पहले गंदे पानी की सप्लाई हो रही थी। बच्ची रितिका की मौत और अन्य बच्चे बीमार होने का जिम्मेदार जनस्वास्थ्य विभाग है। जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ विनोद ने बताया कि अब तक 20 सैंपल लिये हैं, सभी सही मिले हैं। गांव में जिन कर्मचारियों ने लापरवाही बरती है, उन्हें नोटिस दिए जाएंगे।
महिला दलियो ने बताया कि मेरी पोती रितिका को पीलिया हुआ था, उसे पहले कैथल ले गए, डाक्टरों ने जबाव दे दिया, इसके बाद तीन दिन कुरुक्षेत्र के निजी अस्पताल में रखा, वहां पर कोई सुधार नहीं हुआ और डाक्टर ने जवाब दे दिया। इसके बाद पीजीआइ चंडीगढ़ ले गए, इलाज के दौरान पीजीआई में ही दम तोड़ दिया। बच्ची के इलाज पर ढाई लाख रुपये खर्च हुए, सब पैसा गांव के लोगों से उठाकर खर्च किया।
मेरा बेटा दिहाड़ी-मजदूरी करता है, इसलिए हमारे पास एक भी पैसा नहीं था। नेता और प्रशासन के लोग सहायता का आश्वासन तो दे रहे हैं, लेकिन कहीं से सहायता नहीं मिली है। महिला दलियो ने बताया कि सारा सत्यानाश सरपंच ने किया। जब पांच से छह बच्चे बीमार हुए थे, सरपंच प्रतिनिधि सुनील को बताया था, लेकिन उसने हमारी बात नहीं सुनी। बच्ची के मरने के बाद प्रशासन हरकत में आया।
पीड़ित बच्चे लक्ष्य की मां ने बताया कि मेरे बेटे को पहले पेट में दर्द हुआ, इसके बाद टेस्ट कराया तो हेपेटाइटस-ए की शिकायत मिली। बेटा 10 दिनों से पीलिया से पीड़ित है। चार दिन निजी अस्पताल में भी इलाज करवाया, अब सुधार हो रहा है। महिला ने बताया कि उसके परिवार में दो बच्चे बीमार हैं।
सरपंच प्रतिनिधि सुनील ने बताया कि पिछले दो दिनों से बच्चों की हालत में सुधार हो रहा है। सोमवार को जो 30 सैंपल लिये थे, सबकी रिपोर्ट में भी नेगेटिव आई है। बच्चों को मामा या बुआ के भेजने की बात गलत है। कैथल में 10 बच्चे दाखिल हैं, इसके अलावा कहीं भी बच्चों को नहीं भेजा है। जिस मुहल्ले में बच्चे पीलिया से ग्रस्त हैं, वहां सरकारी स्कूल में बच्चे कम जा रहे हैं। सजूमा में जो भी अधिकारी और कर्मचारी की लापरवाही मिली है। उनके खिलाफ रिपोर्ट बनाकर विभागीय कार्रवाई के लिए लिखा है। उच्चाधिकारी रिपोर्ट के आधार पर ही फैसला लेंगे। -कृष्ण कुमार गिल, एसई, जनस्वास्थ्य विभाग।
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