मोहम्मद रफी से गाना गवाने के लिए डर रहे थे प्रोड्यूसर, बिना पैसे लिए फिर सिंगर ने गाया गाना और रचा इतिहास
मोहम्मद रफी एक ऐसे सिंगर थे जिनकी आवाज को हर संगीतकार अपनी धुन में उतारना चाहता था। हर एक्टर चाहता था कि उनकी आवाज रफी साहब बनें। रफी साहब जितने शानदार सिंगर थे, उतने ही जिंदादिल वह इंसान थे। वह हमेशा मदद के लिए आगे रहते थे। अब उनका एक किस्सा आपको बताते हैं जब उन्होंने बिना पैसे लिए गाना रिकॉर्ड किया।इस गाने के लिए रफी साहब के पास पहुंचे श्याम जी घनश्याम जीयह बात है 1974 की जब एक कम बजट की फिल्म बन रही थी जिसका नाम था ठोकर। म्यूजिक की जिम्मेदारी श्याम जी घनश्याम की थी। वह खुद इंडस्ट्री में अपनी जगह बना रहे थे। उन्होंने एक धुन तैयार की और उन्हें लगा कि इसके लिए परफेक्ट सिंगर मोहम्मद रफी ही होंगे। उन्होंने जब इस बारे में प्रोड्यूसर स्वर्ण सिंह को बताया तो वह परेशान हो गए। उन्होंने कहा कि मैं एक छोटी फिल्म बना रहा हूं और इसमें रफी साहब से गाना गवाना काफी मुश्किल है। मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं।रफी साहब के घर बिना अपॉइंटमेंट लिए पहुंचेश्याम जी लेकिन अपनी धुन के साथ कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे। वह सिर्फ रफी साहब को इसमें लेना चाहते थे और वह बिना अपॉइंटमेंट लिए रफी साहब के घर पहुंच गए और उनके सामने सीधा अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मैंने एक धुन बनाई है और मैं इसमें सिर्फ आपकी आवाज चाहता हूं, लेकिन प्रोड्यूसर के पास पैसे नहीं हैं आपको देने के लिए।रिकॉर्डिंग के लिए छोटे स्टूडियो पहुंचे रफीरफी साहब ने कहा पैसे-वैसे छोड़ो, पहले मुझे अपनी धुन सुनाओ। श्याम जी ने उन्हें धुन सुनाई जिसके बाद रफी साहब इसे गाने के लिए तैयार हो गए। वह फिर रिकॉर्डिंग स्टूडियो आए जो काफी छोटा था, लेकिन रफी साहब ने कोई शिकायत नहीं की और पूरी मेहनत से गाना गाया अपनी आंखों में बसाकर।बिना पैसे लिए गाया गानाअब जैसे ही गाना रिकॉर्ड हुआ, प्रोड्यूसर स्वर्ण थोड़े संकोच के पास रफी साहब के पास एक लिफाफे में थोड़े पैसे लेकर आए। रफी साहब ने उनका हाथ रोका और कहा कि मैं इसके लिए एक भी पैसे नहीं लूंगा, इन्हें आप अपने पास ही रखिए।श्याम जी से कहा आगे मदद के लिए बुलानाउन्होंने फिर श्याम जी के कंधे पर हाथ रखकर कहा कि तुमने काफी अच्छी धुन बनाई है और आगे भी कभी किसी मदद की जरूरत हो तो बताना।मोहम्मद रफी की ऐसी दरियादिली देखकर सब उनके फैन थे और हमेशा उनके पास मदद के लिए आते थे। यहां तक कि कई बार रफी साहब के कॉम्पटीटर सिंगर भी खुद म्यूजिक कंपोजर को रफी साहब के पास भेजते थे।
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