नाले की खुदाई में मिला करोड़ों का खजाना, सोने के बिस्किट और सिक्के; इतिहास से कनेक्शन

Aug 16, 2026 - 08:23
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नाले की खुदाई में मिला करोड़ों का खजाना, सोने के बिस्किट और सिक्के; इतिहास से कनेक्शन

आपने कभी सोचा है कि नाले की खुदाई हो रही है और उसमें से करोड़ों का खजाना मिल जाए। ऐसा हुआ है बेल्जियम के सिंट-गिलिस-डेंडरमोंडे शहर में। यहां पर मजदूर एक सामान्य नाले की मरम्मत का काम कर रहे थे। इसी दौरान मजदूरों को जमीन के भीतर छिपा हुआ अनमोल खजाना मिला। सीवर की पाइपलाइन बिछाने के लिए की जा रही खुदाई के दौरान मिले इस खजाने में भारी मात्रा में सोने के सिक्के, सोने के बिस्किट और कीमती सिल्लियां शामिल हैं। शुरुआती अनुमानों के अनुसार इस खजाने की कुल कीमत लगभग नौ मिलियन यूरो है। भारतीय मुद्रा में यह करीब अस्सी से पचासी करोड़ रुपए आंकी गई है।अचानक से सोना उगलने लगी जमीनचौंका देने वाला यह मामला तब सामने आया, जब अठारह साल का एक छात्र, गर्मियों की छुट्टियों में वहां मजदूरी कर रहा था। उसे पुरानी बीयर फैक्ट्री के पास नाली खोदने का काम मिला था। कुदाल चलाते समय उसे मिट्टी और तहखाने की पुरानी दीवार के पीछे कुछ धातु जैसी चीज टकराने की आवाज सुनाई दी। जब उसने और उसके साथी कामगारों ने वहां से मिट्टी हटाई तो उन्हें लगा कि यह मामूली सिक्के हैं, लेकिन और गहराई तक जाने पर सोने की चमकदार छड़ें और पुराने समय की सिल्लियां बाहर आने लगीं।खबर फैलते ही इलाके में भारी भीड़ जुटने लगी। लोग अपने स्तर पर खजाना तलाशने की कोशिश करने लगे। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। सुरक्षा के दृष्टिकोण से पूरे क्षेत्र को सील कर दिया गया। बरामद किए गए पूरे खजाने को सुरक्षित सरकारी तिजोरी में जमा कर दिया गया है।किसका है यह खजानाइतिहासकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि यह खजाना उन्नीसवीं सदी का है। इसका संबंध उस समय की एक प्रसिद्ध बीयर फैक्ट्री के मालिक थियोफिलस वान एशे से है। माना जा रहा है कि उस दौर की राजनीतिक उथल-पुथल या वित्तीय असुरक्षा के चलते उन्होंने अपनी जिंदगी भर की कमाई को इस तरह तहखाने की दीवार में चुनवा कर सुरक्षित छिपा दिया होगा। दशकों तक दीवार के पीछे दबे रहने के कारण यह खजाना आज तक किसी की नजरों में नहीं आ सका था।अब खजाने का क्या होगाबेल्जियम के कानून के मुताबिक अगर कोई ऐतिहासिक खजाना मिलता है तो उसके असली मालिक या वारिस की खोज के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाती है। असली मालिक या उनके वंशजों को इस खजाने पर अपना दावा साबित करने के लिए पांच साल का समय दिया जाएगा। अगर तब भी कोई भी वैध वारिस सामने नहीं आता है, तो संपत्ति कानून के आधार पर इस संपत्ति को उस जमीन के मालिक और खजाना खोजने वाले मजदूरों के बीच विभाजित कर दिया जाएगा।

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