चतरा जेल में बंद टीएसपीसी उग्रवादी की मौत पर भड़के स्वजन, ₹2 लाख रंगदारी नहीं देने पर हत्या का आरोप

Aug 17, 2026 - 02:35
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चतरा जेल में बंद टीएसपीसी उग्रवादी की मौत पर भड़के स्वजन, ₹2 लाख रंगदारी नहीं देने पर हत्या का आरोप

चतरा मंडल कारा में टीएसपीसी उग्रवादी मंटू गंझू की मौत के बाद जेल प्रशासन पर गंभीर सवाल उठे हैं। जेल प्रशासन आत्महत्या का दावा कर रहा है, जबकि परिजनों ने हत्या का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

चतरा जेल में बंदी मंटू गंझू की मौत पर उठे सवाल परिवार ने लगाया हत्या का आरोप।

जागरण संवाददाता, चतरा। टीएसपीसी उग्रवादी मंटू गंझू की मौत के बाद स्थानीय मंडल कारा एक बार फिर सुर्खियों में है। आर्म्स एक्ट के मामले में करीब दो वर्षों से जेल में बंद टीएसपीसी उग्रवादी मंटू गंझू उर्फ दिलेश सिंह की मौत ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों की निगरानी और जेल अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

जेल प्रशासन के अनुसार मंटू ने फांसी लगाने का प्रयास किया था, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और सदर अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। वहीं, मृतक के परिजनों ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए जेल प्रशासन पर सुनियोजित हत्या का गंभीर आरोप लगाया है। मंटू पलामू जिले के मनातू थाना क्षेत्र के केदल गांव का रहने वाला था।

घटना के बाद जिला प्रशासन की निगरानी में मेडिकल बोर्ड गठित कर शव का पोस्टमार्टम कराया गया। बोर्ड में मजिस्ट्रेट के रूप में हंटरगंज अंचल अधिकारी रितिक कुमार तथा चिकित्सक डॉ. अजहर, डाॅ. बिनय मेहता और डॉ. शैलेंद्र कुमार शामिल थे।

मृतक के भाई संटू सिंह ने सदर थाना प्रभारी को आवेदन देकर काराधीक्षक, कक्षपाल समेत अन्य जेलकर्मियों पर हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। उसका आरोप है कि कुछ दिन पूर्व जेल के फोन से मंटू ने उसे बताया था कि उसे प्रताड़ित किया जा रहा है और दो लाख रुपये की मांग की जा रही है।

16 अगस्त को सुबह करीब 9:30 बजे परिजनों को मंटू की तबीयत खराब होने की सूचना दी गई। अस्पताल पहुंचने पर उसकी मौत की जानकारी मिली। परिजनों का दावा है कि शव देखने पर गले और शरीर के अन्य हिस्सों में चोट के निशान दिखाई दिए।

इसी आधार पर उन्होंने शव लेने से इनकार कर दिया और मानवाधिकार आयोग समेत पुलिस, न्यायपालिका, राज्यपाल व मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई है। स्वजन शव लेने से इंकार कर दिया था। बाद में काफी समझाने बुझाने के बाद रविवार की रात शव लेकर गए। मंटू की मौत ने सबसे बड़ा सवाल मंडल कारा की आंतरिक सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर खड़ा किया है।

यदि जेल प्रशासन के दावे के अनुसार बंदी ने आत्महत्या का प्रयास किया, तो सवाल है कि कड़ी सुरक्षा और लगातार निगरानी के बावजूद उसे ऐसा मौका कैसे मिला?

जेल में प्रतिबंधित वस्तुओं, बंदियों की गतिविधियों और संवेदनशील स्थानों की निगरानी की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी? घटना के समय ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच जरूरी है।

दूसरी ओर, यदि स्वजनों के आरोपों में सच्चाई है तो मामला और गंभीर हो जाता है। जेल जैसी सुरक्षित जगह में किसी कैदी के साथ मारपीट या हत्या की स्थिति बनना पूरी व्यवस्था की जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा। ऐसे में केवल आत्महत्या या बीमारी का हवाला देकर मामले को समाप्त करना पर्याप्त नहीं होगा।

घटना से पहले और बाद की पूरी गतिविधि की जांच आवश्यक है। सबसे अहम कड़ी जेल परिसर में लगे सीसीटीवी हो सकते हैं। घटना से पहले मंटू किन लोगों के संपर्क में था, किस स्थान पर था, कौन-कौन से कर्मचारी ड्यूटी पर थे और अस्पताल ले जाने से पहले उसके साथ क्या हुआ, इन सभी सवालों के जवाब सीसीटीवी फुटेज और ड्यूटी रजिस्टर से मिल सकते हैं।

साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिकार्ड और जेल के अभिलेखों की भी निष्पक्ष जांच जरूरी है। सदर थाना प्रभारी अनिल उरांव ने बताया कि जेल प्रबंधन की ओर से मंटू के फांसी लगाने के प्रयास की लिखित सूचना दी गई है, जबकि परिजन हत्या का आरोप लगा रहे हैं। फिलहाल यूडी केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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