नेपाल बाढ़ में डूबा बैंक, अंदर था 51 करोड़ का खजाना! अब पुलिस ने ऐसे बचाया कैश-सोना
नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही के बाद अब वहां जिंदगी को संवारने की कोशिशें जारी हैं। वहीं इस भयानक बाढ़ के बाद नेपाल पुलिस ने एक बैंक से करोड़ों रुपये का कैश, सोना और जरूरी दस्तावेज सुरक्षित बाहर निकाले। इसके लिए पुलिस ने करीब आठ घंटे तक अभियान चलाया।पुलिस ने बाढ़ से प्रभावित एग्रीकल्चर डेवलपमेंट बैंक की त्रिशूली ढुंगे शाखा के वॉल्ट से करीब 1.5 करोड़ रुपये नकद और लगभग 50 करोड़ रुपये कीमत का सोना बाहर निकाला। इसके अलावा बैंक के जरूरी दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भी सुरक्षित निकाले गए। बैंक से बाहर निकाली गई पूरी रकम, सोना और दस्तावेजों को कड़ी सुरक्षा के बीच एक सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। इस पूरे अभियान के दौरान पुलिस ने बैंक की संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए विशेष सावधानी बरती।नेपाल पुलिस ने शेयर किया वीडियोनेपाल पुलिस ने इस पूरे अभियान की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयक की है। पुलिस ने इसके साथ एक वीडियो भी जारी किया, जिसमें बैंक से कैश, सोना और जरूरी दस्तावेज निकालने में जुटे लोग नजर आ रहे हैं। नेपाल पुलिस ने बताया कि करीब 8 घंटे की लगातार मेहनत के बाद बैंक से लगभग 1.5 करोड़ रुपये नकद, करीब 50 करोड़ रुपये कीमत का सोना और जरूरी दस्तावेज सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए। इसके बाद इन सभी सामान को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। यह अभियान ऐसे समय में चलाया गया, जब नेपाल भयंकर बाढ़ और भूस्खलन से जूझ रहा है। बाढ़ और भूस्खलन ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है और सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चितवन जिले में अधिकारियों ने उन बाढ़ पीड़ितों के शवों को सामूहिक रूप से दफनाना शुरू कर दिया है, जिनकी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। बताया गया है कि ये शव बाढ़ के पानी के साथ बहकर चितवन जिले तक पहुंचे थे।नेपाल में बाढ़ पीड़ितों को दफनाना शुरूनेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात बेहद खराब हैं। कई इलाकों में बाढ़ के पानी के साथ बहकर आए शवों की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। इसी बीच अधिकारियों ने बिना पहचान वाले शवों को दफनाना शुरू कर दिया है। बाढ़ प्रभावित रासुवा घाटी से करीब 200 किलोमीटर दूर देवघाट के जंगल में सैकड़ों कब्रें तैयार की गई हैं। अधिकारियों के मुताबिक, कई शव इतनी बुरी तरह सड़ चुके थे कि उनकी पहचान करना संभव नहीं हो पाया।बता दें कि, देवघाट का यह जंगल आमतौर पर लोग सुबह की सैर के लिए इस्तेमाल करते हैं। लेकिन फिलहाल इसे अस्थायी रूप से शवों को दफनाने की जगह बनाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि सड़ते हुए शवों से आसपास के लोगों की सेहत को खतरा हो सकता था, इसलिए उन्हें जल्द दफनाना जरूरी था। समाचार एजेंसी के मुताबिक, चितवन के मुख्य जिला अधिकारी गणेश आर्यल ने कहा कि उनके पास शवों को दफनाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। उनकी सबसे बड़ी चिंता शवों के तेजी से सड़ने की वजह से लोगों की सेहत पर पड़ने वाले खतरे को लेकर थी।
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