इंडोनेशिया भूकंप: घर-इमारत जमींदोज, 20 लोगों की मौत, सूनामी अलर्ट के बाद सहमे लोग
इंडोनेशिया के फ्लोरेस द्वीप क्षेत्र में शनिवार सुबह-सुबह आए 7.7 की तीव्रता वाले शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। जमीन हिलते ही कई इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं और कई इलाकों में भूस्खलन शुरू हो गया। इस आपदा में अब तक कम से कम 20 लोगों के मारे जाने की खबर है, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं।अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, भूकंप सुबह स्थानीय समयानुसार 5:58 बजे आया। इसका केंद्र जमीन से सिर्फ 10 किलोमीटर की गहराई में था। भूकंप इतना तेज था कि झटके महसूस होते ही तटीय इलाकों में सूनामी की चेतावनी जारी कर दी गई, जिससे अफरा-तफरी मच गई।जमींदोज हुई इमारतें, सड़कों पर आए मरीजभूकंप के झटके इतने तेज थे कि सिक्का, पश्चिम मंगराई और पूर्व मंगराई इलाकों में दर्जनों घर और इमारतें पूरी तरह तबाह हो गईं।सोशल मीडिया और स्थानीय टीवी चैनलों पर आए फुटेज में दिख रहा है कि भूकंप आते ही अस्पतालों के भीतर से मरीजों और डॉक्टरों को आनन-फानन में बाहर खुले मैदान में लाया गया।नागेकेओ इलाके में डर के मारे लगभग 2,000 ग्रामीण अपने घरों को छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हुए हैं।पूर्वी नुसा तेंगारा के पुलिस प्रमुख रूडी डार्मको ने बताया कि कई शहरों और गांवों में बिजली की सप्लाई ठप्प हो गई है और फोन नेटवर्क ठप्प होने से राहत कार्य में काफी दिक्कतें आ रही हैं।मलबे में जिंदगी की तलाश, हाईवे बंदमौके पर मौजूद बचाव दल की टीम मलबे में दबे लोगों को निकालने में जुटी हुई है। मामेरे सर्च एंड रेस्क्यू एजेंसी के प्रमुख फथुर रहमान के अनुसार, मलबे और भूस्खलन की चपेट में आने से 20 शव बरामद किए जा चुके हैं। कम से कम छह लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जबकि भूस्खलन के मलबे में दबे दो ग्रामीणों की तलाश जारी है।इसके अलावा एंडे इलाके में पहाड़ों से मलबा गिरने की वजह से मुख्य 'ट्रांस-फ्लोरेस हाईवे' पूरी तरह बंद हो गया है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने और एम्बुलेंस की आवाजाही में भारी रुकावट आ रही है।सूनामी की चेतावनी वापस ली गईभूकंप के तुरंत बाद समुद्र में असामान्य हलचल देखी गई और कुछ तटीय इलाकों में 1 मीटर (लगभग 3 फीट) से कम ऊंची सूनामी लहरें दर्ज की गईं।हालांकि, भूकंप और उसके बाद आए आफ्टरशॉक्स के लगभग तीन घंटे बाद सूनामी की चेतावनी वापस ले ली गई। इंडोनेशियाई मौसम विज्ञान एवं भूभौतिकी एजेंसी (BMKG) के निदेशक विजायांतो ने बताया कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन समुद्र के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।1992 के खौफनाक मंजर की यादें ताजाइंडोनेशिया 'पैसिफिक रिंग ऑफ फायर' पर बसा है, जिसकी वजह से यहां अक्सर भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते रहते हैं। इसी साल 1 अप्रैल को उत्तर मालुकु में 7.4 तीव्रता का भूकंप आया था, लेकिन शनिवार को आया यह भूकंप इस साल की सबसे भयानक प्राकृतिक आपदा बन गया है।इस घटना ने 1992 की यादें ताजा कर दी हैं, जब फ्लोरेस द्वीप पर आए 7.7 तीव्रता के भूकंप और उसके बाद आई सूनामी ने करीब 2,500 लोगों की जान ले ली थी।
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