इमरजेंसी फंड के लिए अलग बैंक अकाउंट क्यों है जरूरी? ये है पैसे बचाने का आसान तरीका
अचानक नौकरी चली जाए, मेडिकल खर्च आ जाए, घर में कोई बड़ी मरम्मत करवानी पड़े या परिवार में कोई बिना बताए जिम्मेदारी आ जाए। तो ऐसे समय में इमरजेंसी फंड सबसे बड़ा सहारा बनता है। लेकिन अगर यही पैसा आपके रोजमर्रा के सेविंग अकाउंट में पड़ा है, तो उसे बिना सोचे-समझे खर्च करने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए ये जरूरी है कि इमरजेंसी फंड का पैसा आपके रोजाना के इस्तेमाल होने वाल बैंक अकाउंट में नहीं होना चाहिए। इमरजेंसी फंड ऐसा पैसा होना चाहिए जो मुश्किल वक्त में तुरंत मिल जाए, लेकिन इतना आसानी से खर्च न हो कि सेल, शॉपिंग या छुट्टी के नाम पर चुपचाप खत्म हो जाए। यहां जानिये क्यों जरूरी है इमरजेंसी फंड को अलग बैंक अकाउंट में रखना?इमरजेंसी फंड को अलग रखना क्यों है जरूरी?मान लीजिए आपके अकाउंट में 1 लाख रुपये पड़े हैं और उसी खाते से किराना, शॉपिंग, बिल और ऑनलाइन पेमेंट होते हैं। ऐसे में आपको यह महसूस होना मुश्किल हो सकता है कि इसमें से कितना पैसा असल में खर्च करने के लिए उपलब्ध है। लेकिन अगर यही 1 लाख रुपये एक अलग अकाउंट में रखे हों, तो उसे देखकर दिमाग में साफ रहता है कि यह पैसा सिर्फ मुश्किल समय के लिए है।क्यों बनाएं अलग बैंक अकाउंटहालांकि, इमरजेंसी फंड के लिए अलग अकाउंट रखना कोई अनिवार्य नियम नहीं है। असली बात यह है कि जरूरत पड़ने पर पैसा आसानी से उपलब्ध होना चाहिए। अलग अकाउंट रखने का एक और फायदा यह है कि आप इसमें हर महीने ऑटोमैटिक ट्रांसफर सेट कर सकते हैं। सैलरी आते ही एक तय रकम इस अकाउंट में चली जाए तो धीरे-धीरे बड़ा सुरक्षा कवच तैयार हो जाता है। इससे आपके मुख्य अकाउंट में बची रकम भी आपको महीने का असली खर्च समझने में मदद करती है।इस बात का रखें ध्यानलेकिन इमरजेंसी फंड बनाते समय सिर्फ ज्यादा ब्याज के पीछे भागना सही नहीं है। 24 जुलाई 2026 को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार सेविंग डिपॉजिट की दर 2.50 प्रतिशत थी, जबकि एक साल या उससे अधिक पीरियड के टर्म डिपॉजिट पर दरें 6.00 से 6.75 प्रतिशत के बीच थीं। एफडी ज्यादा ब्याज दे सकती है, लेकिन पूरे इमरजेंसी फंड को लॉक करना सही नहीं होगा। क्योंकि जरूरत पड़ने पर तुरंत पैसे निकालने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में एक बैलेंस तरीका अपनाया जरूरी होगा। जरूरत पड़ने वाली रकम सेविंग अकाउंट में रखें और बड़े इमरजेंसी फंड का कुछ हिस्सा ऐसे ऑप्शन में रखें जहां पैसा जल्दी मिल सके।इमरजेंसी फंड को भी करें चेकबैंक डिपॉजिट पर DICGC के तहत प्रति जमाकर्ता प्रति बैंक लागू सीमा तक 5 लाख रुपये तक का डिपॉजिट इंश्योरेंस मिलता है, जिसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल हैं। इसलिए बड़ी रकम रखने वालों को यह समझना चाहिए कि उनका पैसा किस तरह अलग-अलग बैंक खातों में रखा गया है। सबसे जरूरी बात यह है कि इमरजेंसी फंड की रकम हमेशा एक जैसी नहीं रहती। नौकरी, ईएमआई, परिवार की जिम्मेदारियां और मासिक खर्च बदलने के साथ इसकी समीक्षा भी करनी चाहिए।
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