आतंकियों का महिमामंडन करने वाली किताब पर जम्मू में ऐक्शन, तीन प्रकाशक गिरफ्तार
जम्मू कश्मीर में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई की है। इसके तहत रविवार को पुलिस ने तीन प्रकाशकों को गिरफ्तार किया। इनकी दो विवादास्पद किताबें प्रदेश के स्कूलों की लाइब्रेरी में मिली हैं। हालांकि एक विवादित किताब, ‘पर्सनैलिटीज एंड लीजेंड्स ऑफ जम्मू और कश्मीर’, जम्मू यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी में साल 2022 से है। हाल ही में इस किताब पर आरोप लगा था कि इसमें अलगाववादी नेताओं और आतंकियों की तारीफ की गई है। इसके बाद से इस किताब को सील करके जम्मू यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी से हटा दिया गया है। इस किताब में हाफिज सईद तक की तारीफ की गई थी।साल 2017 में पहली बार प्रकाशितहिलाल अहमद और संतोष मीना द्वारा लिखी गई यह किताब पहली बार 2017 में दिल्ली स्थित पैराडाइज प्रेस से प्रकाशित हुई थी। यही संस्करण, यहां पर पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट ने खरीदा था। साल 2017 में, जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार थी, जिसमें भाजपा भी शामिल थी। जब जम्मू विश्वविद्यालय ने इसे 2022 में खरीदा, तब जम्मू-कश्मीर एक संघ शासित प्रदेश था और केंद्रीय शासन के तहत था। जम्मू-कश्मीर में प्रशासन के प्रमुख लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति हैं। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक जम्मू विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने बताया कि यह किताब कई छात्रों और राजनीतिक विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं के अनुरोध पर खरीदी गई थी। हालांकि, इसे इश्यू कराने वाले छात्रों की संख्या बहुत कम रही है।यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहाकि उनकी जिम्मेदारी, करीब पांच लाख किताबों को अलग-अलग सेक्शन में लगााना, उन्हें यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर देना और डेटा बनाए रखना शामिल है। लाइब्रेरी में कश्मीर का अलग सेक्शन है। विवादित किताबों को वापस लेने वाले सर्कुलर के बाद, ‘पर्सनैलिटीज़ एंड लीजेंड्स ऑफ जम्मू-कश्मीर को छोड़कर, सरकार ने ग्रेट पर्सनैलिटीज ऑफ जम्मू और कश्मीर पर भी रोक लगा दी। जम्मू के कॉलेजों, यूनिवर्सिटी और पब्लिक लाइब्रेरीज में एकेडमिक मटीरियल का विस्तृत अकादमिक और कंटेंट ऑडिट कराने का आदेश दिया गया। इस ऑडिट का मकसद ऐसे मटीरियल की जांच करना है जो सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से आतंकवाद, हिंसक उग्रवाद, अलगाववाद, कट्टरता या किसी भी गतिविधि को बढ़ावा देता हो, महिमामंडित करता हो, वैध ठहराता हो या सही ठहराता हो।अधिकारियों ने क्या कहाजम्मू यूनिवर्सिटी में अधिकारियों ने कहाकि उन्होंने संस्थान के पूरे संग्रह को देखा है। इस दौरान एक भी किताब ऐसी नहीं मिली जो आपत्तिजनक हो। एक अधिकारी ने कहाकि हमारे पास विक्रेताओं से किताबें खरीदने के लिए एक मजबूत और पारदर्शी सिस्टम है। पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट के एक टीचर ने कहाकि उनके सेक्शन में करीब 50,000 किताबें हैं। कभी-कभी, शोधकर्ता किसी खास किताब की मांग करते हैं, और उसे खरीदने से पहले उसके सामग्री को देखने का समय बहुत कम होता है। उन्होंने कहाकि वे सामान्यतः कैटलॉग देखते हैं, जिसमें प्रकाशकों द्वारा दी गई किताबों की सूची होती है। छात्रों या शोधकर्ताओं की मांग के आधार पर किताबें मंगवाई जाती हैं। इसके बाद बिल सेंट्रल लाइब्रेरी को भेज दिए जाते हैं।
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