NCRB रिपोर्ट 2024 का चौंकाने वाला खुलासा, नाबालिग हत्यारों में दिल्ली सबसे आगे, महाराष्ट्र-बिहार भी टॉप पर

Jul 11, 2026 - 00:34
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NCRB रिपोर्ट 2024 का चौंकाने वाला खुलासा, नाबालिग हत्यारों में दिल्ली सबसे आगे, महाराष्ट्र-बिहार भी टॉप पर
<p><a title="देश" href="https://www.abplive.com" target="_self">देश</a> में अपराध का चेहरा तेजी से बदल रहा है और सबसे चिंताजनक बदलाव यह है कि अब हत्या जैसे जघन्य अपराधों में नाबालिगों की भूमिका लगातार बढ़ रही है. NCRB की 2024 रिपोर्ट इस ट्रेंड को बेहद स्पष्ट और असहज करने वाले आंकड़ों के साथ सामने रखती है.</p> <p><strong>राष्ट्रीय तस्वीर: 34 हजार से ज्यादा केस, 1,120 हत्या में नाबालिग शामिल</strong></p> <p>रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में कुल 34,878 मामलों में नाबालिग आरोपी पाए गए, जो पिछले साल के मुकाबले 11.2% की बढ़ोत्तरी दर्शाता है. इनमें से 1,120 मामले हत्या (Section 103/104 BNS या IPC 302) से जुड़े हैं. &nbsp;सबसे अहम बात यह है कि 16 से 18 वर्ष आयु वर्ग इस अपराध प्रवृत्ति का केंद्र बन चुका है. कुल नाबालिग आरोपियों में 77.7 प्रतिशत इसी आयु वर्ग के हैं. हत्या के मामलों में भी यह ट्रेंड साफ दिखता है. 16&ndash;18 आयु वर्ग में 1,212 लड़कों के मुकाबले सिर्फ 20 लड़कियां पकड़ी गईं, यानी हिंसक अपराधों में साफ तौर पर लड़के ही आगे आगे हैं.&nbsp;</p> <p><strong>टॉप 10 राज्य: जहां नाबालिगों के हाथों सबसे ज्यादा हत्याएं</strong></p> <p>राज्यों के स्तर पर आंकड़े सामाजिक-आर्थिक असमानताओं और क्षेत्रीय दबावों की कहानी भी कहते हैं.</p> <p>महाराष्ट्र &ndash; 128 केस<br />बिहार &ndash; 122 केस<br />हरियाणा &ndash; 102 केस<br />मध्य प्रदेश &ndash; 101 केस<br />तमिलनाडु &ndash; 100 केस<br />छत्तीसगढ़ &ndash; 72 केस<br />राजस्थान &ndash; 66 केस<br />गुजरात &ndash; 54 केस<br />तेलंगाना &ndash; 41 केस<br />पंजाब &ndash; 40 केस</p> <p>महाराष्ट्र और बिहार लगातार इस सूची में शीर्ष पर बने हुए हैं, जो यह संकेत देता है कि बड़े राज्यों में अपराध की जड़ें गहरी और जटिल हैं. दिलचस्प रूप से, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में यह संख्या 35 रही, जो तुलनात्मक रूप से कम है.</p> <p><strong>टॉप 10 शहर: दिल्ली बना &lsquo;आउटलायर&rsquo;</strong></p> <p>महानगरों में स्थिति और ज्यादा तीखी दिखती है. 2 मिलियन से अधिक आबादी वाले 19 शहरों में कुल 266 हत्या के मामले नाबालिगों से जुड़े पाए गए.</p> <p>दिल्ली &ndash; 134 केस<br />मुंबई &ndash; 33 केस<br />नागपुर &ndash; 17 केस<br />बेंगलुरु &ndash; 8 केस<br />अहमदाबाद &ndash; 7 केस<br />पुणे &ndash; 7 केस<br />इंदौर &ndash; 5 केस<br />चेन्नई &ndash; 4 केस<br />कानपुर &ndash; 4 केस<br />हैदराबाद &ndash; 3 केस</p> <p>दिल्ली अकेले 50% से ज्यादा मामलों (134) के साथ सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बनकर उभरी है. वहीं महाराष्ट्र के मुंबई, नागपुर और पुणे को मिलाकर 57 केस दर्ज हुए&mdash;यह दर्शाता है कि शहरी क्लस्टर में अपराध की सघनता ज्यादा है.</p> <p><strong>हत्या से पहले की चेतावनी: &lsquo;अटेम्प्ट टू मर्डर&rsquo; के आंकड़े</strong></p> <p>हत्या के आंकड़ों के पीछे एक और खतरनाक परत छिपी है. हत्या के प्रयास (Attempt to Murder). &nbsp;उदाहरण के तौर पर, बिहार में जहां 122 हत्या के केस हैं, वहीं 673 हत्या के प्रयास के मामले भी दर्ज हुए. यह बताता है कि हिंसा का पैटर्न अचानक नहीं बनता, बल्कि यह धीरे-धीरे विकसित होता है, जहां समय रहते हस्तक्षेप न हो तो अपराध और गंभीर हो जाता है.&nbsp;</p> <p><strong>जड़ में क्या है समस्या?</strong></p> <p>NCRB के आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि एक सामाजिक संकेत हैं. विशेषज्ञ इसे &ldquo;सोशलाइजेशन की प्रक्रिया&rdquo; और पर्यावरणीय प्रभावों से जोड़ते हैं, जहां पारिवारिक माहौल, आर्थिक दबाव, शहरी तनाव, और डिजिटल एक्सपोज़र जैसे कारक मिलकर नाबालिगों को अपराध की ओर धकेलते हैं.</p> <p><a title="&lt;strong&gt;Suvendu Adhikari PA Murder: 'बर्बर हत्या, हम यहां के गुंडों को...', बंगाल चुनाव नतीजों के बाद PA चंद्रनाथ रथ की हत्या पर शुभेंदु अधिकारी का पहला रिएक्शन&lt;/strong&gt;" href="https://www.abplive.com/news/india/congress-only-formed-government-in-kerala-how-india-first-party-shrunk-to-4-states-5-big-signs-of-decline-explained-3126119" target="_self"><strong>Suvendu Adhikari PA Murder: 'बर्बर हत्या, हम यहां के गुंडों को...', बंगाल चुनाव नतीजों के बाद PA चंद्रनाथ रथ की हत्या पर शुभेंदु अधिकारी का पहला रिएक्शन</strong></a></p> <p><strong>सबसे बड़ा खतरा &lsquo;16-18 आयु वर्ग&rsquo;</strong></p> <p>पूरे डेटा का सबसे अहम निष्कर्ष यही है कि 16&ndash;18 वर्ष के किशोर भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं, खासकर जघन्य अपराधों में. सवाल सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं है, यह समाज, परिवार और नीति-निर्माताओं के लिए एक चेतावनी है. अगर इस आयु वर्ग में समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में यह ट्रेंड और खतरनाक रूप ले सकता है.&nbsp;</p> <p><a title="&lt;strong&gt;'कार तेज स्पीड में थी, तभी अचानक...', शुभेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ मर्डर में चश्मदीद ने abp न्यूज़ को बताई आंखों देखी&lt;/strong&gt;" href="https://www.abplive.com/news/india/suvendu-adhikar-pa-murder-eyewitness-told-abp-news-about-death-of-personal-assistant-in-west-bengal-ann-3126287" target="_self"><strong>'कार तेज स्पीड में थी, तभी अचानक...', शुभेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ मर्डर में चश्मदीद ने abp न्यूज़ को बताई आंखों देखी</strong></a></p>

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