Nag Panchami 2026 Puja: कौन हैं सांपों की अधिष्ठात्री देवी, भगवान शिव से है खास नाता, नाग पंचमी पर दर्शन

Aug 17, 2026 - 02:35
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Nag Panchami 2026 Puja: कौन हैं सांपों की अधिष्ठात्री देवी, भगवान शिव से है खास नाता, नाग पंचमी पर दर्शन

माता मनसा देवी को भी सांपों की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। ज्योतिषचार्य राहुल अग्रवाल के अनुसार इस बार 17 अगस्त को नाग पंचमी और सोमवार के होने से जहां बहुत ही महत्वपूर्ण योग बन रहा है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव का जल अभिषेक करने से और नाग देवता के पूजन आदि करने से जीवन में सुख संपन्निता आदि बनी रहती है। इस दिन मनसा देवी की विशेष पूजा की जाती है। मनसा देवी का मंदिर प्रमुख हरिद्वार में है। इस दिन यहां खास तौर पर पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इस दिन लोग इनकी सर्पदंश और कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए पूजा करते हैं। कहीं कहीं मनसा देवी को नागों की माता कहा जाता है। कहा जाता है कि ये सर्पदंश से रक्षा करने वाली और संतान-सुख देती हैं। इन्हें पद्मा या विषहरी नामों से भी जाना जाता है। इनको विषहरि इसलिए कहा जाता है क्योंकि देवी सांपों के विष से रक्षा करती हैं। भारत में सांपों की संख्या भी अधिक है, इसलिए इनकी पूजा का महत्व भी बढ़ा है। ये भगवान् शिव की पुत्री हैं, लेकिन शिव परिवार की तरह इनकी पूजा नहीं होती है। इन्हें सिर्फ सुरक्षा और समृद्धि की देवी के रूप में पूजा जाता है।नाग देवता को क्या अर्पित करेंज्योतिषचार्य भारत ज्ञान भूषण के अनुसार श्रावण माह में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पूजा का यह पर्व मनाया जाता है। ज्योतिषाचार्या रुचि कपूर के अनुसार इस दिन सावन का तीसरा सोमवार भी है। पूजा सामग्री कच्चा दूध, नाग देवता की तस्वीर या मूर्ति, कपूर, चंदन, कुमकुम, अक्षत और सफेद फूल लेकर पूजा करें।नाग पंचमी पर पूजन मुहूर्तअमृत योग सुबह 05:50 से 07:29, शुभ योग सुबह 09:08 से 10:46 बजे, लाभामृत योग दोपहर 03:42 से शाम 06:59 बजे, अभिजित योग 11:58 से 12:51 बजे तक।नाग पंचमी पर शुभ योगश्रावण मास के तीसरे सोमवार यानी आज नागपंचमी का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। नाग पंचमी सोमवार के दिन पड़ने से इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है। ज्योतिषविदों के अनुसार, आज सूर्योदय के समय चित्रा नक्षत्र, बालव करण, बुधादित्य योग और शुभ योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस महासंयोग में भगवान शिव और नाग देवता की पूजा-अर्चना करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलेगी।डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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