CJP प्रोटेस्ट; 13 केस होंगे बंद, SC पहुंची दिल्ली पुलिस; लेकिन 2873 को राहत नहीं
दिल्ली में हुए CJP के प्रदर्शनों से जुड़े 13 मामलों पर अब आगे कार्रवाई नहीं होगी। केंद्र सरकार के निर्देश पर दिल्ली पुलिस सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि वह जुलाई में हुए CJP विरोध प्रदर्शनों से जुड़े 13 मामलों पर अब आगे कोई कार्रवाई नहीं करना चाहती है। वह इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर रही है। हालांकि 2,873 लोगों के खिलाफ हिंसा में उनकी भूमिका की जांच के लिए नया मामला दर्ज करने की भी मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट दिल्ली पुलिस की याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है।अनुच्छेद 142 का किया इस्तेमालसीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की बात पर गौर किया। उन्होंने मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की थी। जब बेंच दिन की कार्यवाही के बाद उठने वाली थी तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हम एक अंतरिम आवेदन दाखिल करना चाहते हैं। यह मामले रद्द करने के बारे में है। हम इसके लिए (संविधान के) अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर रहे हैं।शीर्ष अदालत ने कहा- कोई समस्या नहींइस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि पक्षकार समझौता कर रहे हैं तो कोई समस्या नहीं है। मामले में मंगलवार को सुनवाई होगी। याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार के 25 जुलाई को लिए गए निर्णय के मुताबिक, दिल्ली पुलिस अब CJP के प्रदर्शनों के सिलसिले में दर्ज 13 एफआईआर पर आगे नहीं बढ़ना चाहती है।आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों राहत नहींहालांकि गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोग विरोध प्रदर्शन वाली जगह पर मौजूद थे। इन प्रदर्शनों के दौरान शारीरिक नुकसान या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे अपराधों में उनकी कोई भूमिका थी या नहीं, इसका पता लगाने के लिए जांच की जरूरत है। ऐसे में इनके खिलाफ नया केस दर्ज किया जाना चाहिए। अत: दिल्ली पुलिस ने इन 2,873 लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की इजाजत मांगी है।जनहित का दिया हवालाहालांकि पुलिस ने साफ किया है कि जिन घटनाओं का जिक्र आवेदन में है उनके लिए कोई केस दर्ज नहीं किया जाएगा। आवेदन में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस जनहित और मामले के खास तथ्यों को देखते हुए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत FIR रद्द करने... और नई FIR दर्ज करने की अनुमति मांग रही है। शीर्ष अदालत आवेदन को मंजूर करते हुए साफ कर सकता है कि आदेश मामले के खास तथ्यों पर आधारित है। ऐसे में इसे नजीर नहीं माना जाएगा। यह घटनाक्रम ऐसे वक्त में सामने आया है जब CJP ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन का ऐलान कर दिया है।
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