गोवा में भी भाजपा लाना चाहती थी धर्मांतरण-रोधी कानून, पार्टी के भीतर ही होने लगा विरोध
गोवा में धर्मांतरण विरोधी कानून लाने की भाजपा सरकार की कोशिश को फिलहाल झटका लगा है। विधायकों के विरोध के बाद राज्य सरकार ने फैसला किया है कि गोवा धर्म के गैरकानूनी धर्मांतरण पर रोक विधेयक, 2026 को विधानसभा के मौजूदा तीन दिवसीय मॉनसून सत्र में पेश नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने सोमवार सुबह विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले कई विधायकों के साथ बैठक की। बताया जा रहा है कि मीटिंग में भाजपा के कुछ विधायकों के अलावा भाजपा समर्थक निर्दलीय विधायक ने भी प्रस्तावित विधेयक का विरोध किया। भाजपा विधायक माइकल लोबो ने कहा कि सरकार ने विधेयक को मंत्रिमंडल से मंजूरी दिलाने में जल्दबाजी की। उन्होंने कहा कि इस कानून को लाने से पहले इसके प्रावधानों का अध्ययन करना और सभी पक्षों को विश्वास में लेना जरूरी है। बैठक में यह सहमति बनी कि फिलहाल विधेयक विधानसभा में पेश नहीं किया जाएगा। माइकल लोबो ने कहा कि सभी धर्मों की धार्मिक भावनाएं अहम हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए। गोवा में इस मुद्दे पर जल्दबाजी करने के बजाय चर्चा की जरूरत है, क्योंकि राज्य में अलग-अलग धर्मों के लोग लंबे समय से आपसी सद्भाव के साथ रहते आए हैं।आखिर प्रस्तावित कानून के किस बात पर आपत्ति भाजपा समर्थक निर्दलीय विधायक अलेक्सियो रेजिनाल्डो लॉरेंसो ने भी प्रस्तावित कानून के समय और जरूरत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार गोवा में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण नहीं हो रहा है और सरकार के पास ऐसा साबित करने के लिए पर्याप्त आंकड़े या आंकड़ों पर आधारित प्रमाण भी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि गोवा शांतिपूर्ण राज्य है और कानून लाकर इस सामाजिक सौहार्द को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। लॉरेंसो ने यह भी कहा कि धर्मांतरण से जुड़े कुछ मामलों में आरोपपत्र दाखिल नहीं हुए, जबकि कुछ मामले अदालतों में खत्म हो गए या उनमें अंतिम रिपोर्ट दाखिल की गई। राज्य मंत्रिमंडल ने पिछले सप्ताह इस विधेयक को मंजूरी दी थी। प्रस्तावित कानून में बल, दबाव, अनुचित प्रभाव, लालच, धोखाधड़ी या विवाह के माध्यम से धर्मांतरण कराने पर कड़ी सजा का प्रावधान था। इसमें आजीवन कारावास तक की सजा, कम से कम 50 हजार रुपये जुर्माना और पीड़ित को पांच लाख रुपये तक मुआवजा देने का प्रस्ताव रखा गया था। धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को कम से कम 60 दिन पहले जिलाधिकारी या अतिरिक्त जिलाधिकारी के सामने घोषणा देने की बात कही गई थी कि धर्म परिवर्तन उसकी स्वेच्छा से और बिना किसी दबाव के किया जा रहा है। अगर किसी विवाह का उद्देश्य केवल गैरकानूनी धर्मांतरण कराना पाया जाता, तो उस विवाह को अमान्य घोषित करने का प्रावधान था। ऐसे धर्मांतरण में शामिल धार्मिक व्यक्तियों के लिए तीन से 10 साल तक की जेल का प्रस्ताव रखा गया था।
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