माफी मांगो; वंदे मातरम् विवाद पर बंकिम चंद्र चटर्जी के वंशज की सोनिया गांधी से मांग

Aug 16, 2026 - 08:23
0 0
माफी मांगो; वंदे मातरम् विवाद पर बंकिम चंद्र चटर्जी के वंशज की सोनिया गांधी से मांग

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् को लेकर हुई हिचकिचाहट ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। अब इस मामले में वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चटोपाध्याय के वंशज भी शामिल हो गए हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को 14 पेजों की चिट्ठी लिखकर वंदे मातरम् का अपमान करने के लिए माफी मांगने की अपील की है।पश्चिम बंगाल से भाजपा विधायक और बंकिम चंद्र चटोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने कांग्रेस नेता से अपील की है कि वह इस गलती के लिए बिना शर्त माफी मांग लें। गांधी को लिखे पत्र में चटर्जी ने कहा कि 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में हुई वह घटना दुर्भाग्यपूर्ण थी। वहां पर उस ऐतिहासिक गलती तो दोहराया भी गया। यह निंदनीय है।वंदे मातरम् के अपमान पर आहत हूं- चटर्जीपश्चिम बंगाल की नहाटी विधानसभा से विधायक चटर्जी ने कहा कि वे एक आम नागरिक और देशभक्त बंकिम चंद्र चटर्जी के वंशज के तौर पर माफी की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, इस घटना से उनके अंदर एक गहरा दुख और खालीपन आया है।चटर्जी ने कहा कि श्री अरबिंदो ने भी इस गीत की तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि इस मंत्र ने उन्हें 'देशभक्ति के धर्म' से परिचित करवाया है। ऐसे मंत्र को आजाद भारत की धरती पर भी पूरा गाने में हिचकिचाहट होना खुदीराम बोस जैसे शहीदों के बलिदान का अपमान है।आजादी की लड़ाई में वंदे मातरम् का योगदानचटर्जी ने आजादी की लड़ाई में वंदे मातरम् के योगदान का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे 1906 के बनारस कांग्रेस अधिवेशन में सरला देवी चौधरानी ने द्वारा इसे गाया गया था। इसके बाद 1909 में राजद्रोह के मुकदमे में बाल गंगाधर तिलक ने भी अपने समर्थकों के साथ इसे गाया था। इतना ही नहीं 1938 में हैदराबाद की उस्मानिया यूनिवर्सिटी में राष्ट्रवादी छात्रों द्वारा निज़ाम की पाबंदियों के बावजूद इसे एक नारे के तौर पर इस्तेमाल करना शामिल है।वंदे मातरम् पर कांग्रेस की दोहरी नीति नई बात नहींचटर्जी ने आरोप लगाया कि वंदे मातरम् पर कांग्रेस की दोहरी नीति कोई नई बात नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि 1937 में पार्टी ने मोहम्मद अली जिन्ना की आपत्तियों के आगे घुटने टेक दिए थे और उस साल अक्तूबर में गीत को छोटा कर दिया था। उन्होंने कहा कि पार्टी के व्यवहार में उस समझौते की झलक फिर से दिखाई दे रही है।उन्होंने इस बात की ओर इशारा किया कि कांग्रेस की अपनी पश्चिम बंगाल छात्र शाखा, छात्र परिषद, मंत्र मोदेर संजीवनी वंदे मातरम नारे का इस्तेमाल करती है, और सवाल उठाया कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उसी गीत को लेकर असहज क्यों है।चटर्जी ने कहा कि वंदे मातरम किसी एक राजनीतिक पार्टी की संपत्ति नहीं, बल्कि देश की सामूहिक याद, बंकिम चंद्र की अमर विरासत और शहीदों के खून और बलिदान से हासिल एक पवित्र राष्ट्रीय प्रतीक है; इसलिए इस गीत का सम्मान करना भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का सम्मान करने के बराबर है।वंदे मातरम् के अपमान से पश्चिम बंगाल के लोगों की भावनाएं आहत हुईं- चटर्जीचटर्जी ने कहा कि आजादी के दिन कांग्रेस मुख्यालय में जो कुछ भी हुआ है। उससे पश्चिम बंगाल के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने सोनिया गांधी से अपील की कि वह इस बात पर आत्ममंथन करें और बिना किसी शर्त के सभी देशवासियों से माफी मांगे। खासतौर पर पश्चिम बंगाल के लोगों से बिना शर्त माफी मांगें।गौरतलब है कि यह पूरा विवाद 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में शुरू हुआ था। वहां पर राष्ट्रगान के साथ में वंदे मातरम् शुरू हुआ था। इसके बाद कथित तौर पर सोनिया गांधी इसको बजाने से रोकती हुई नजर आई थी। इस पर भाजपा ने जमकर निशाना साधा है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User