'बाढ़ आ रही है, भागो'; नेपाल में अजनबी ने कैसे बचाई 370 छात्रों और टीचर्स की जान

Aug 31, 2026 - 12:53
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'बाढ़ आ रही है, भागो'; नेपाल में अजनबी ने कैसे बचाई 370 छात्रों और टीचर्स की जान

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के दौरान एक अनजान व्यक्ति की चेतावनी ने 370 से अधिक छात्रों और टीचरों की जान बचा ली। घटना नुवाकोट जिले के बेत्रावती स्थित उत्तरगया पब्लिक स्कूल की है। बुधवार सुबह स्कूल में पढ़ाई शुरू ही हुई थी और हॉस्टल में रहने वाले बच्चे नाश्ता कर रहे थे। तभी एक अज्ञात शख्स स्कूल के पास से तेज आवाज में चिल्लाते हुए गुजरा- 'बड़ी बाढ़ आ रही है, भागो।' उस समय न तो कोई सायरन बजा था और न ही प्रशासन की ओर से कोई चेतावनी मिली थी। लेकिन उसकी आवाज सुनकर टीचर तुरंत सतर्क हो गए और बच्चों को स्कूल के पीछे मौजूद पहाड़ी और जंगल की ओर ले जाने लगे। रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े बच्चे खुदकर भागे जबकि छोटे बच्चों को शिक्षकों ने संभाला। कई को कीचड़ के बीच उठाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। स्कूल के अंग्रेजी टीचर सोमलाल डंगोल ने बताया कि किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि बाढ़ इतनी बड़ी हो सकती है। शुरुआत में कई बच्चों को लगा कि नदी का पानी ज्यादा नहीं बढ़ेगा, लेकिन कुछ ही समय में स्थिति भयावह हो गई। कक्षा 10 के छात्र सुजल लामा ने बताया कि वह सुबह की पढ़ाई के बाद नाश्ता करने जा रहा था। अगर वह उस समय भोजन करने चला जाता तो शायद बाढ़ की चपेट में आ जाता। चेतावनी मिलते ही वह जंगल की ओर भागा और पूरी रात वहीं रहा।कुछ बच्चे कीचड़ से ढक गएकक्षा 8 की छात्रा रश्मि तमांग ने बताया कि कुछ बच्चे कीचड़ से ढक गए थे और कई छोटे बच्चे तेजी से नहीं भाग पा रहे थे। टीचरों ने उन्हें किसी तरह ऊपर पहुंचाया। इस दौरान एक दर्दनाक घटना भी हुई। छात्र आयुष तमांग को बचाने स्कूल जा रहे उसके पिता नवराज तमांग रास्ते में बाढ़ के तेज बहाव में बह गए, जबकि आयुष जंगल की ओर भागकर बच गया। बाढ़ के बाद स्कूल प्रशासन के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई। संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण टीचरों के लिए बच्चों और उनके परिवारों से संपर्क करना मुश्किल हो गया।परिवारों से संपर्क करने की कोशिशसब-प्रिंसिपल पवन शर्मा ने बताया कि अभिभावक लगातार देश और विदेश से फोन कर रहे थे। स्कूल प्रशासन ने करीब 25 से 30 प्रतिशत बच्चों को सीधे उनके माता-पिता तक पहुंचा दिया था और बाकी परिवारों से संपर्क करने की कोशिश जारी थी। कई बच्चे अलग-अलग समूहों में ऊंचे स्थानों पर चले गए थे। इस कारण सभी छात्रों की तत्काल स्थिति का पता लगाना मुश्किल हो गया। स्कूल की ओर से छात्रों की मौत की कोई पुष्ट संख्या जारी नहीं की गई है।

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