BTech की पढ़ाई, 14 साल बाद IT की नौकरी छोड़ शुरू की मशरूम की खेती, अब हर माह कमा रहे 10 लाख से ज्यादा

Aug 17, 2026 - 02:35
0 1
BTech की पढ़ाई, 14 साल बाद IT की नौकरी छोड़ शुरू की मशरूम की खेती, अब हर माह कमा रहे 10 लाख से ज्यादा

आज के समय में ज्यादातर युवा इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद अच्छी नौकरी और बड़ी कंपनी में करियर बनाने का सपना देखते हैं। मगर, ओडिशा के नबरंगपुर के रहने वाले विक्रमदेव महापात्र की कहानी काफी अलग है। उन्होंने भी हर इंजीनियरिंग स्टूडेंट की तरह बीटेक की पढ़ाई कर 14 साल आईटी सेक्टर में काम किया। लेकिन फिर एक ऐसा फैसला लिया, जिसने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी। उन्होंने सॉफ्टवेयर और कॉर्पोरेट की दुनिया छोड़कर मशरूम की खेती को अपना नया करियर बनाया। आज उनका यह कारोबार न केवल अच्छी कमाई कर रहा है, बल्कि कई लोगों को रोजगार भी दे रहा है।BTech के बाद शुरू किया IT करियरटाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक विक्रमदेव ने 2012 में ओडिशा के बिजू पटनायक यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्ऱॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने IT सेक्टर में कदम रखा। अगले 14 सालों में उन्होंने डिस्कोवर्चर सॉल्यूशंस, माइंडट्री, सेरोल टेक्नोलॉजीज और एलटीआईमाइंडट्री जैसी कंपनियों में काम किया। इन कंपनियों में उन्होंने कई तरह की जिम्मेदारियां सौंपी गई। यानी उनके पास एक अच्छा और सफल कॉर्पोरेट करियर था।नौकरी छोड़ने का किया फैसलालेकिन विक्रमदेव ने एक समय पर अपने करियर की दिशा पूरी तरह बदलने का फैसला किया। उन्होंने कॉर्पोरेट नौकरी जारी रखने के बजाय ओडिशा के नबरंगपुर लौटने का फैसला कियाष और गंगा भूमी मशरूम नाम से कमर्शियल मशरूम उत्पादन और प्रोसेसिंग यूनिट शुरू की। इस तरह सॉफ्टवेयर और IT की दुनिया से निकलकर उन्होंने खेती और एग्री-बिजनेस को अपना नया करियर बना लिया।हर दिन 500 से 600 किलो हो रहा मशरूम का उत्पादनमीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी की जानकारी के अनुसार, इस यूनिट की उत्पादन क्षमता करीब 500 किलोग्राम मशरूम प्रतिदिन है। इस हिसाब से महीने में लगभग 15 से 18 टन मशरूम तैयार किए जाते हैं। तैयार मशरूम की सप्लाई ब्रह्मपुर और भुवनेश्वर जैसे बड़े बाजारों में की जाती है। इससे कारोबार को पूरे साल चलाने में मदद मिलती है। बता दें कि बिजनेस से जुड़ी सभी खर्चों को निकालने के बाद इस यूनिट से हर महीने 10 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई होने का दावा किया गया है।नौकरी करने के बजाय अब दे रहे रोजगारविक्रमदेव की कहानी की सबसे खास बात सिर्फ उनका IT करियर छोड़ना नहीं है, बल्कि यह भी है कि अब वह खुद दूसरों को रोजगार दे रहे हैं। उनकी मशरूम यूनिट में 24 लोग काम करते हैं, जिनमें 18 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल हैं। उनकी कहानी दिखाती है कि रोजगार के लिए हमेशा बड़े शहरों की ओर जाना जरूरी नहीं है। स्थानीय जरूरत और बाजार को समझकर ग्रामीण इलाकों में भी आधुनिक कृषि आधारित कारोबार खड़ा किया जा सकता है।छात्रों को क्या मिल रही है सीखविक्रमदेव की कहानी छात्रों को यह भी सिखाती है कि किसी डिग्री का मतलब यह नहीं है कि पूरी जिंदगी उसी क्षेत्र में काम करना जरूरी है। इंजीनियरिंग से मिली समस्या सुलझाने, विश्लेषण करने और मैनेजमेंट जैसी स्किल्स का इस्तेमाल खेती और बिजनेस जैसे क्षेत्रों में भी किया जा सकता है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User