ईरान की इकॉनमी पर ट्रंप की धमकी का क्या मतलब? समझिए अमेरिका की रणनीति

Aug 17, 2026 - 02:35
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ईरान की इकॉनमी पर ट्रंप की धमकी का क्या मतलब? समझिए अमेरिका की रणनीति

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी है। इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर बेहद कड़ी आर्थिक चोट करने का ऐलान किया है। शुक्रवार को राष्ट्रपति ने कहा कि तेहरान को अब पहले से कहीं ज्यादा दर्दनाक आर्थिक दबाव झेलना पड़ेगा। इस बयान से एक दिन पहले यानी गुरुवार को ही अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने चेतावनी दी थी कि वॉशिंगटन अगले सप्ताह ही ईरान के खिलाफ ऐसे कठोर कदम उठाएगा, जिन्हें दुनिया ने अब तक कभी नहीं देखा होगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर अमेरिका ईरान के खिलाफ क्या करने जा रहा है?दरअसल, यह धमकी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ पिछले लगभग पांच दशकों से ईरान पर विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध लगाए हुए हैं। 1970 के दशक के अंत से ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन और क्षेत्रीय उग्रवादी संगठनों को समर्थन देने के कारण व्यापार प्रतिबंध, संपत्तियों की जब्ती और वित्तीय नाकेबंदी लागू की गई है। फरवरी में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से वॉशिंगटन ने इन प्रतिबंधों को और अधिक सख्त बना दिया है। समुद्री मार्गों, ऊर्जा निर्यात और वित्तीय लेन-देन पर नए प्रतिबंध लगाए गए हैं तथा होर्मुज में नौसैनिक नाकाबंदी भी शुरू कर दी गई है।अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) के आंकड़ों से पता चलता है कि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से एजेंसी ने एक हजार से अधिक व्यक्तियों, जहाजों और विमानों पर प्रतिबंध लगाए हैं। हाल के महीनों में ईरान के छाया तेल बेड़े (शैडो ऑयल फ्लीट), शिपिंग बीमा कंपनियों, हथियार खरीद में सहायता करने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों तथा डिजिटल क्रिप्टो एक्सचेंजों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया है। इन कार्रवाइयों के परिणामस्वरूप ईरान से जुड़ी क्रिप्टोकरेंसी परिसंपत्तियों में लगभग 500 अरब डॉलर की रकम फ्रीज कर दी गई है। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन अब और भी व्यापक तथा घातक विकल्पों पर विचार कर रहा है जैसे....चीनी 'टीपॉट' रिफाइनरियों पर निशानाईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा हिस्सा चीन जाता है। केप्लर के 2025 के आंकड़ों के अनुसार, ईरान से भेजे गए कुल तेल का 80 प्रतिशत से अधिक चीन खरीदता है। इस व्यापार का बड़ा हिस्सा चीनी स्वतंत्र रिफाइनरियां संभालती हैं, जिन्हें आम बोलचाल में 'टीपॉट्स' कहा जाता है। ये रिफाइनरियां चीन की कुल रिफाइनरी क्षमता का लगभग एक-चौथाई हिस्सा हैं और अक्सर बहुत कम या नकारात्मक लाभ मार्जिन पर काम करती हैं।पिछले अमेरिकी प्रतिबंधों ने बड़ी स्वतंत्र रिफाइनरियों को ईरानी तेल खरीदने से रोक दिया था, लेकिन छोटे टीपॉट्स अभी भी इस व्यापार में सक्रिय हैं। प्रतिबंध विशेषज्ञों का कहना है कि ये रिफाइनरियां अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से बहुत कम जुड़ी हुई हैं, इसलिए इन्हें सीधे निशाना बनाना अपेक्षाकृत कठिन है। फिर भी अगर वॉशिंगटन इन पर द्वितीयक प्रतिबंध लगाता है, तो ईरान के तेल राजस्व को झटका लग सकता है।चीनी बैंकों पर संभावित कार्रवाईओएफएसी ने पहले ही चीन और हांगकांग की कई छोटी कंपनियों पर द्वितीयक प्रतिबंध लगाए हैं। इन पर अरबों डॉलर का ईरानी तेल प्रोसेस करने और हथियार खरीद में मदद करने का आरोप है। वित्त विभाग ने दो बड़े चीनी बैंकों को औपचारिक चेतावनी भी दी है कि अगर उनके सिस्टम से ईरानी धनराशि गुजरती हुई पाई गई, तो उन पर भी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। हालांकि अभी तक इन बैंकों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।विशेषज्ञों का मानना है कि इन बड़े बैंकों पर प्रतिबंध लगाने से वैश्विक वित्तीय प्रणाली पर गंभीर असर पड़ सकता है। साथ ही, इससे बीजिंग की ओर से जवाबी कार्रवाई की आशंका भी बढ़ जाएगी। ट्रंप प्रशासन इस वर्ष के अंत में राष्ट्रपति ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच संभावित बैठक से पहले तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है।हालांकि अमेरिका को टेंशन इस बात की है कि चीन उन्नत तकनीक के लिए जरूरी महत्वपूर्ण खनिजों के निर्यात में कटौती कर सकता है, जबकि अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगी अभी अपनी आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने में लगे हुए हैं।'व्हैक-अ-मोल' रणनीति जारीअमेरिका ईरानी व्यक्तियों और कंपनियों के साथ-साथ चीन तथा खाड़ी देशों में सक्रिय उन बिचौलियों को भी लगातार निशाना बना रहा है, जो तेहरान को प्रतिबंधों से बचकर राजस्व जुटाने में मदद कर रहे हैं। हाल ही में वित्त विभाग ने उन फर्मों पर प्रतिबंध लगाए हैं जो ईरान के तेल राजस्व को आयात के भुगतान में बदलने में सहायता करती हैं। ऑब्सीडियन रिस्क एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक ब्रेट एरिक्सन ने इस रणनीति को 'व्हैक-अ-मोल' बताया है। उनके अनुसार, ईरान प्रतिबंधित संस्थाओं की जगह तुरंत नई संस्थाएं बना लेता है, जिससे असर सीमित रह जाता है।फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के प्रतिबंध विशेषज्ञ मियाद मालेकी का कहना है कि वित्त सचिव बेसेंट संभवतः तेल शिपर्स, खरीदारों और मुद्रा विनिमयकर्ताओं के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई का संकेत दे रहे थे। आगे विमानन क्षेत्र पर भी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, जिससे ईरान की अंतरराष्ट्रीय व्यापार क्षमता और कमजोर पड़ेगी।भूमि नाकाबंदी का विकल्पकुछ अमेरिकी और इजरायली अधिकारी जमीनी नाकाबंदी की भी बात कर रहे हैं। इसके लिए ईरान के पड़ोसी देशों ( इराक, तुर्की, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, अजरबैजान और आर्मेनिया) की सक्रिय सहयोग की जरूरत होगी। ट्रंप प्रशासन अफगानिस्तान को छोड़कर बाकी देशों के साथ अलग-अलग स्तर पर संबंध रखता है। हालांकि सीमावर्ती इलाके पहाड़ी और दुर्गम हैं, जिससे प्रभावी गश्त बेहद कठिन है।अमेरिका पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा सकता है, जिसने हाल ही में 10 अरब डॉलर की मुद्रा विनिमय सुविधा मांगी है। तुर्की पर भी दबाव संभव है, क्योंकि वह अमेरिकी एफ-35 लड़ाकू विमान कार्यक्रम में फिर से शामिल होना चाहता है। जमीनी नाकाबंदी से ईरान में भोजन, ऊर्जा और कपड़ों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे आम नागरिकों पर दबाव बढ़ेगा। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसे लागू करना व्यावहारिक रूप से बहुत कठिन है और इससे तेहरान के अंदर बड़े पैमाने पर विरोध या राजनीतिक दबाव पैदा होने की संभावना कम है।सेकेंडरी टैरिफ की धमकीराष्ट्रपति ट्रंप ने बार-बार चेतावनी दी है कि वे उन देशों के सामान पर भारी शुल्क लगाएंगे जो ईरान के साथ व्यापार करते हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे कर के कानूनी आधार को पहले ही खारिज कर दिया है। पिछले सप्ताह सीनेट ने रूस पर व्यापक प्रतिबंधों वाला विधेयक पारित किया है, जिसमें ईरान संबंधी नए प्रावधान शामिल हैं। इस विधेयक से राष्ट्रपति को उन देशों के खिलाफ अतिरिक्त शुल्क लगाने की शक्ति मिल सकती है जो ईरान के व्यापार और हथियार खरीद में सहायता करते हैं।अब यह विधेयक प्रतिनिधि सभा में जाएगा, जहां शुल्क संबंधी प्रावधानों को लेकर डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन सांसदों के बीच गंभीर मतभेद हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह कानून पारित हो जाता है, तो ट्रंप प्रशासन के पास ईरान पर दबाव बढ़ाने का एक और शक्तिशाली हथियार उपलब्ध हो जाएगा।

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