आशा कार्यकर्ताओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना बंद किया जाए और

बिहार राज्य आशा संघ और बिहार राज्य आशा फैसिलिटेटर संघ (एटक) के राज्यव्यापी आह्वान पर आज प• चंपारण की सैकड़ों आशा एवं आशा फैसिलिटेटर जिला पदाधिकारी कार्यालय के समक्ष एकजुट होकर अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर समहरणालय गेट के पास धरने पर बैठी ।

Jul 13, 2026 - 11:49
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आशा कार्यकर्ताओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना बंद किया जाए और

13/07/2026

प•चम्पारण बेतिया आशिष कुमार 

------- बिहार राज्य आशा संघ और बिहार राज्य आशा फैसिलिटेटर संघ (एटक) के राज्यव्यापी आह्वान पर आज प• चंपारण की सैकड़ों आशा एवं आशा फैसिलिटेटर जिला पदाधिकारी कार्यालय के समक्ष एकजुट होकर अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर समहरणालय गेट के पास धरने पर बैठी । प्रदर्शन के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए कहा कि वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बनी आशा बहनों के साथ लगातार उपेक्षा की जा रही है। उनका बकाया भुगतान लंबित है, ड्रेस और मोबाइल रिचार्ज मद की राशि में कटौती की जा रही है, जबकि लगातार काम का बोझ बढ़ाया जा रहा है। इस संबंध मे संघ के अध्यक्ष ओमप्रकाश क्रांती ने बताया की आशा कार्यकर्ताओं और आशा फैसिलिटेटर का लंबित भुगतान अविलंब किया जाए, ड्रेस एवं मोबाइल रिचार्ज की राशि में की गई कटौती वापस ली जाए, सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष की जाए तथा उम्र सत्यापन के लिए आधार कार्ड को ही मान्य प्रमाण माना जाए। इसके साथ ही तीन वर्षों से अधिक समय से एक ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जमे अकाउंटेंट और बीसीएम का स्थानांतरण करने, आशा एवं फैसिलिटेटर का भुगतान पहले की तरह अश्विनी पोर्टल से कराने, आशा की सेवा स्थायी करने तथा 26 हजार रुपये मासिक मानदेय लागू करने की भी मांग उठाई गई।

प्रदर्शन के दौरान यह भी कहा गया कि आशा कार्यकर्ताओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना बंद किया जाए और एक ही आंगनबाड़ी केंद्र पर दो या तीन आशाओं की बहाली की व्यवस्था समाप्त की जाए। धरना के बाद संघ का दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष ओम प्रकाश क्रांति के नेतृत्व में जिला पदाधिकारी से मिला और उन्हें मांगपत्र सौंपते हुए सभी समस्याओं से विस्तार से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने जिला पदाधिकारी से आग्रह किया कि जब तक आशा एवं आशा फैसिलिटेटर का बकाया भुगतान नहीं हो जाता, तब तक संबंधित प्रभारी, बीसीएम और अकाउंटेंट के भुगतान पर भी रोक लगाने संबंधी निर्देश जारी किए जाएं, ताकि लंबित भुगतान की समस्या का शीघ्र समाधान सुनिश्चित हो सके।

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